आजमगढ़। सगड़ी तहसील के गांव करखिया रुस्तमसराय में गांव एससी वर्ग के लिए आरक्षित प्रधान की सीट पर चुने गए दिलीप पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाने का आरोप लगा था। तहसील, उसके बाद जनपदीय, फिर मंडलीय समिति ने जाति प्रमाण-पत्र का खारिज कर दिया। इसके बाद भी प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं। कई बार मामले की शिकायत होने के बाद भी पंचायती राज विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ग्राम पंचायत चुनाव में हरैया ब्लॉक का करखिया रुस्तम सराय गांव एससी वर्ग के लिए आरक्षित था। चुनाव में दिलीप ने अशोक को हराया था। अशोक ने दिलीप ने जाति प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए एसडीएम सगड़ी से शिकायत की थी। जाति प्रमाण-पत्र में दिलीप को एससी बताते हुए पिता के रूप में सूर्यदेव का नाम अंकित किया गया था। जबकि सूर्यदेव क्षत्रिय परिवार से थे। जांच के बाद एसडीएम ने जाति प्रमाण-पत्र को फर्जी मान इसे बनाने के लिए ग्राम विकास अधिकारी को दोषी माना था। लेखपाल को भी इस साजिश में शामिल पाया गया था। एसडीएम ने प्रमाणपत्र निरस्त करने के लिए इसे जिला स्तरीय सत्यापन समिति को भेज दिया था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय सत्यापन समिति ने भी जाति प्रमाण-पत्र को फर्जी बताया। इतना ही नहीं फरवरी में कमिश्नर के अध्यक्षता वाली मंडलीय समिति ने भी इसे फर्जी माना। इसके बाद शिकायकर्ता की ओर से डीपीआरओ से शिकायत की गई कि प्रधान द्वारा सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद भी पंचायती राज विभाग की ओर से मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई और प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं।
डीएम ने जांच के लिए गठित की कमेटी
आजमगढ़। अशोक की ओर से मामले की फिर से वित्तीय अनियमितता की शिकायत जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी से की गई तो उन्होंने मामले की जांच के लिए डीपीआरओ को तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद पंचायती राज विभाग की ओर से भी मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है।