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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की भौतिक प्रगति जांचने आज जाएंगे यूपीडा के सीईओ

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आजमगढ़। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद आगमन के ठीक छह माह के बाद यूपीडा के सीईओ एवं प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी नौ अगस्त को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण की भौतिक प्रगति को परखने के लिए एक बार फिर जनपद पहुंचेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12:25 बजे पर उनका राजकीय हेलीकॉप्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पैकेज छह के कैंप कार्यालय किशुनदासपुर पहुंचेगा। इस दौरान वह लगभग एक घंटे तक पैकेज छह और पांच के निर्माण कार्यों की समीक्षा के साथ ही पैकेज छह के कार्य का निरीक्षण भी करेंगे। लंच के बाद वह पैकेज आठ की समीक्षा के लिए गाजीपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। अपर मुख्य सचिव के कार्यक्रम को लेकर के जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। किशुंदासपुर स्थित कैंप कार्यालय को सैनिटाइज कराने के साथ ही हेलीपैड आदि निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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लखनऊ के चांद सराय से गाजीपुर के हैदरिया तक बनने वाले 340 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लगभग 84 किमी का हिस्सा जनपद से होकर गुजर रहा है। एक्सप्रेस-वे सुल्तानपुर जनपद से होकर फूलपुर तहसील के खंडौरा से जनपद आजमगढ़ में प्रवेश करता है। वहीं, सदर तहसील के केरमा से मऊ जनपद में प्रवेश कर जाता है। लगभग 84 किमी का हिस्सा जनपद की चार तहसीलों से होकर गुजर रहा है। इस परियोजना से चार तहसील के 110 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। इसमें सदर तहसील के 41, सगड़ी के 15, निजामाबाद के 22 और फूलपुर के 32 गांव शामिल हैं। इन गांव में 18507 किसानों से कुल 908.1682 हेक्टेयर भूमि किसानों से ली जानी है। वहीं, 112 हेक्टेयर ग्राम समाज की भूमि पुनर्ग्रहित और विनियमित की जा चुकी है। इसी वर्ष नौ फरवरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनपद में पहुंचे थे। किशुंदासपुर स्थित पैकेज-6 के कैंप कार्यालय में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण की समीक्षा की थी। उस समय लगभग 35 फीसद काम पूरा होने की बात कही जा रही थी। मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेस-वे के कार्यों से संतोष जताते हुए दीपावली तक मेन एक्सप्रेस-वे को आवागमन के लिए खोलने का दावा भी किया था। कहा था कि विकास के पायदान पर पिछड़े वाराणसी और गोरखपुर के इस हिस्से को विकास के पथ पर लाने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जा रहा है। इसे औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को यहां पर रोजगार मिलेगा और उनका पलायन रुकेगा।
इसके लगभग डेढ़ माह बाद ही कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। लॉकडाउन के कारण लगभग दो माह तक एक्सप्रेस-वे का भी कार्य बुरी तरीके से प्रभावित रहा। लॉकडाउन खुलने के बाद एक्सप्रेस-वे का निर्माण एक बार फिर तेजी के साथ किया गया। साथ ही बाहरी जनपदों और प्रदेशों से पलायन कर घर वापस आने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी यहां रोजगार उपलब्ध कराया गया। बताया जा रहा है कि लगभग 24 घंटे तीन शिफ्टों में एक्सप्रेसवे का कार्य किया गया। इससे लॉकडाउन के बाद में भी कार्यदायी संस्थाओं ने लगभग 60 फ़ीसदी की प्रगति हासिल कर ली है। मुख्य राजस्व अधिकारी हरिशंकर ने बताया कि यूपीडा के सीईओ का कार्यक्रम मिल गया है। उनके आगमन को लेकर के तैयारियां शुरू कर दी गई है।
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