आजमगढ़। सगड़ी के अजमतगढ़ में शारदा सहायक खंड-32 नहर के बृहस्पतिवार देर रात टूटने से किसानों की 150 से 175 बीघे फसल डूब गई है। किसानों ने सुबह विभाग को पटरी टूटने की जानकारी भी दी, लेकिन शाम तक इसकी मरम्मत नहीं की गई। इससे किसान खासा आक्रोशित हैं।
जिला प्रशासन नहरों की सफाई के लाख दावे कर ले, लेकिन सच्चाई ये है कि ढंग से सफाई न होने का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। एक के बाद एक स्थान से नहरों के टूटने और पानी ओवरफ्लो की सूचनाएं आ रही हैं। इससे किसानों की फसल डूब रही है। अभी दीदारगंज और सरायमीर क्षेत्र में नहरों के टूटने और ओवरफ्लो होने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बृहस्पतिवार की रात अजमतगढ़ में मेघई खास और नरेना के बीच में मुसलमानपुर प्राइमरी स्कूल के पास नहर की पटरी टूट गई। खेतों में पानी घुसने से मेघई खास अजमतगढ़, मुरारपुर, मुसलमानपुर, सोकहना, नरैना के किसानों की लगभग 150 बीघे से ज्यादा की फसल डूब गई है। सुबह जानकारी होने के बाद किसान जीयनपुर में नगर विभाग के आफिस पहुंचकर इसकी जानकारी दी। इसके बाद भी शाम तक पटरी की मरम्मत शुरू नहीं की गई थी। किसानों ने स्वयं गड़ेरुआ में जाकर नहर का फाटक बंद किया। इसके बाद पानी का दबाव कुछ कम हुआ। विभाग की लापरवाही से किसानों में खासा आक्रोश है। प्रभावित किसान कांता सिंह, रामजी सिंह, राम किसुन राम, रामशब्द, रामरतन, फूलचंद राम, नगीना सिंह, शिव बचन राम, श्रीमोहन राम, सुदामा, पिंटू, राजू, चंद्रभान, रामअवध, उदयभान, गोपाल, बेचई सिंह, गया सिंह, शंकर सिंह, राम अवध सिंह आदि ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
नहर की सफाई न होने से 30 बीघे फसल जलमग्न
बिंद्राबाजार। शारदा सहायक खंड-32 की कोहाडौरा-बेलवा माइनर की सफाई न होने से पानी ओवरफ्लो हो रहा है। इससे 30 बीघे से ज्यादा गेहूं की फसल डूब गई। प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। इंजन लगाकर किसान पानी बाहर निकालने का प्रयत्न कर रहे हैं। बेलवा और कोहाडौरा गांव के बीचोंबीच रसूलपुर की तरफ से माइनर निकली है। माइनर की सफाई नहीं होने से पानी ओवरफ्लो होकर बहने लगा। इससे किसानों की लगभग 30 बीघे फसल डूब गई है। किसान सूरत यादव, मूरत यादव, शंकर यादव, रामानंद यादव, हरिचरण यादव, सुखारी सिंह, नेमा, रामधनी ने बताया कि गेहूं के साथ अन्य फ़सलों की खेती की गई है। खेत डूबने से फसल खराब होने की आशंका है। डीजल इंजन लगाकर पानी बाहर निकालने के प्रयत्न किया जा रहा है। एक खेत का पानी दूसरे खेत में जाने की वजह से ये भी संभव नहीं हो पा रहा है।