मेहनगर और अहरौला क्षेत्र में प्राकृतिक कहर और विभाग की लापरवाही ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। दोनोें क्षेत्रों में नहर तटबंध टूटने से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई।
किसान सिर पर हाथ धरे बर्बाद फसलों को देख चिंतित हैं। किसानों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजा दिए जाने की मांग की है। पीड़ित किसानों का कहना है कि सूचना दिए जाने के बाद भी नहर विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
बता दें शनिवार की रात से शुरू हुई चक्रवाती तूफान और ओले ने जहां किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया। वहीं रही-सही कसर सिंचाई विभाग की लापरवाही ने पूरा कर दिया। रविवार की सुबह मेहनगर तहसील क्षेत्र के गोपालपुरपट्टी के पास ठेकमा रजवाहा नहर से कम्हरिया संपर्क शाखा के टूट गई। इससे गोपालपुर के साथ घिनहापुर, कुरुथिया, कम्हरिया, पिलखुवां, शंभूनगर, भिटकासों के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने इसकी सूचना स्थानीय नहर विभाग के अधिकारियों को दी। लेकिन कोई नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने नहर को बांधा। किसान रामवृक्ष पासवान, हरिशंकर सिंह, मुन्ना मौर्या, शंकर आदि का कहना है कि दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बर्बाद फसलों का मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
वहीं स्थानीय नहर विभाग के सहायक अभियंता सत्यदेव का कहना है कि ज्यादा पानी छोड़ दिए जाने से नहर टूट गई थी। नहर को बांध दिया गया है। खेतों में पानी भर जाने से बर्बाद फसलों की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
इसी क्रम में अहरौला क्षेत्र के अजगरा ग्रामसभा में स्थित सिंचाई खंड टांडा द्वितीय उपखंड शाहपुर अनुभाग का तटबंध टूटने से क्षेत्र के दर्जनों किसानों की गेहूं और सरसों की फसल डूब गई। किसान अरुण सिंह ने कहा कि दो दिन से माइनर कटा है, अधिकारियों को अवगत भी कराया गया।
लेकिन अभी तक तटबंध बांधा नहीं गया। किसान राजबहादुर यादव, उमाकांत, भानु प्रताप सिंह का कहना है कि माइनर की सफाई न होने से पानी ओवरफ्लो हो गया। जिसके चलते माइनर कटी है। उधर टांडा अंबेडकर नगर सिंचाई विभाग के एसडीओ द्वितीय तीरथ सिंह का कहना है कि सोमवार को माइनर के कटने की सूचना मिली है। नहर को हेड से बंद कर दिया गया है। सींचपाल को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है कि नहर कटी है या काटी गई है। यदि नहर ओवर फ्लो होकर कटी है तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाएगी।