नेहरु हाल में परिषदीय विद्यालय के मुस्लिम शिक्षको को संबोधित करते डीएम एनपी सिंह।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उपजे तनाव को खत्म करने और लोगों में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से सोमवार को नेहरू हाल में परिषदीय स्कूलों के सभी मुस्लिम शिक्षकों की बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता डीएम नागेंद्र प्रसाद सिंह ने की।
डीएम ने बताया कि 1947 में जब देश आजाद हुआ तब एक सेक्युलर देश बना। पाकिस्तान मजहब आधारित देश बना। बांग्लादेश और अफगानिस्तान भी मजहब आधारित देश हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों 1971 से लेकर 31 दिसम्बर 2014 के मध्य भारत आ गए। ये भारत में नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं। उनके लिए नागरिक संशोधन अधिनियम 2019 बनाया गया है। इस तरह के 31118 लोगों ने भारत में नागरिकता के लिए आवेदन किया है। नागरिकता संशोधन कानून 2019 से एनआरसी का कोई मतलब नहीं है। मुसलमानों को किसी भी प्रकार का दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं है। धारा-6 के अन्तर्गत किसी भी देश के मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति भारत में नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है।
डीएम ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून से किसी भी भारतीय का कोई नुकसान नहीं होने वाला। लोग इस मामले को लेकर आमजन में भ्रम पैदा कर रहे हैं। डीएम ने कहा कि किसी से कोई भी दस्तावेज या प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाएगा, ना ही देना है। यह कानून बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है। इसमें भी वे लोग शामिल हैं, जो धर्म के नाम पर प्रताड़ित होकर यहां शरण लिए हैं। डीएम ने कहा कि इसके बाद भी यदि किसी को कोई शक या भ्रम है तो उसे मेरे पास लाएं, मैं उसका तत्काल भ्रम दूर कर दूंगा। डीएम ने कहा कि मुबारकपुर के कुछ लोगों को गुमराह कर दिया गया था, जहां मैं स्वयं जाकर उन्हें समझाया। अब लोग समझ गए और वहां का माहौल शांत है। डीएम ने कहा कि शिक्षकगण इस मुद्दे पर आगे आए और अपनों के बीच में जाकर लोगों को समझाकर उनका भ्रम दूर करें। ताकि माहौल खराब न होने पाए। ना ही कोई तोडफ़ोड़ या गैरकानूनी रास्ता अपनाएं। इस अवसर पर एसपी त्रिवेणी सिंह, बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय, एजाज राशिद, मो. नोमान, सहला परवीन, लतीफुर्रहमान, आर्सियाबानो, गुलाम मुस्तफा, इस्तेयाक अहमद आदि लोग मौजूद रहे।