दिल्ली, वाराणसी के बाद आजमगढ़ में भी प्रदूषण का असर दिखने लगा है। जिले में मंगलवार भोर में कोहरा देखा गया था, लेकिन बुधवार को दोपहर 12 बजे तक धुंध छाई रही। इसमें छिपा शहर धुंधला-धुंधला सा नजर आने लगा। यह स्थिति देखकर शहरवासी प्रदूषण की आशंका से चिंतित हो उठे हैं।
शहर के नरौली स्थित तमसा नदी के घाटों पर न सिर्फ पूरे शहर का कूड़ा फेंका जाता है बल्कि उसे आग लगाकर नष्ट किया जाता है। दीपावली पर आतिशबाजी के चलते शहर का यह इलाका आतिशबाजी और जलाए गए धुएं के चलते सबसे अधिक प्रदूषित रहा। सुबह से ही नगर क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में कोहरे के रूप में धुंध छाई हुई थी।
शहर के बाहरी क्षेत्रों में बहुत से वाहन चालक गाड़ियों की लाइट जलाकर चलते हुए देखे गए। हालांकि जैसे-जेसे दिन चढ़ता गया धुंध छटती गई लेकिन पूरे दिन खुली धूप नहीं देखने को मिली। नरौली क्षेत्र में लोगों का घरों में रहना दूभर हो गया है।
शाम को कूड़े में लगी आग का धुआं लोगों के घरों में घुसना शुरू हो जाता है। जिसके कारण लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। प्रदूषण के कारण शाम के समय सिविल लाइन क्षेत्र से होकर गुजरने वालेे लोगों को भी सांस लेने में परेशानी होती है। प्रशासन उदासीन है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पास प्रदूषण का स्तर मापने का यंत्र भी नहीं है।
जिले में प्रदूषण मापने का कोई यंत्र नहीं है जिसके चलते प्रदूषण का आकलन नहीं किया जा सकता है। जिले में उद्योग नहीं हैं। जो प्रदूषण है वह वाहनों के धुएं और तमसा नदी के किनारे शहर का कूड़ा.कचरा फेंके जाने और उसको जलाने की वजह से है। नगर पालिका के ईओ को कूड़े का निस्तारण कहीं और करने के लिए कहा गया है। इसके लिए नगर पालिका को नोटिस भेजा गया है। - केके पांडेय, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी