प्रधानमंत्री की ओर अचानक कालेधन के प्रति की गई सर्जिकल स्ट्राइक से हर कोई स्तब्ध नजर आया। एकाएक किसी को यकीन नहीं हुआ कि ऐसा भी हो सकता है। इस निर्णय से हर वर्ग में खलबली मच गई। देर रात तक लोग टीवी से चिपके रहे लेकिन जब स्थिति स्पष्ट हुई तो बहुत से लोगों ने राहत की सांस ली। शहर और देहात क्षेत्र के लोग पूरे दिन एक हजार और पांच सौ के नोट भुनाने की जुगत में लगे रहे जबकि खाद, बीज, कपड़े आदि की खरीदारी करने गए लोगों को बड़े नोट न चलने से निराश होकर लौटना पड़ा।
कालेधन और नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने रात 12 बजे के बाद से एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने का आदेश जारी कर दिया। इस फरमान को जिसने भी सुना उसकी सांसें थम सी गईं। छोटी और मध्यम आय वाले सबसे ज्यादा परेशान दिखे क्योंकि हर किसी के पास एक हजार और पांच सौ के कुछ नोट थे। देर रात तक टीवी के सामने लोग चिपके रहे।
जब स्थिति स्पष्ट हुई कि वह इन नोटों को बैंकों में 30 दिसंबर तक बदल सकते हैं तो उनकी जान में जान आई। अब सबसे बड़ी समस्या यह थी कि बैंक और एटीएम बंद होने के बाद वह दैनिक जरूरतों के सामानों को कैसे खरीदेंगे। जैसे ही यह खबर आई की दवा की दूकानों, बस स्टेशनों, पेट्रोल पंपों और रेलवे स्टेशनों पर इन नोटों को चलाया जा सकता है तो लोग गाड़ी लेकर तेल भरवाने और बड़ी नोटों को छोटी नोटों में बदलने के लिए निकल पड़े लेकिन पेट्रेल पंपों पर जब तक छोटी नोट थी, तब तक सौ और दो सौ रुपये के पेट्रोल बांटे गए लेकिन जब यह नोट खत्म हो गए तो पेट्रोल पंपकर्मी भी पांच सौ और हजार रुपये के नोट में पूरे का पेट्रोल देने पर पंपकर्मी अड़े हुए थे।
उधर, रेलवे स्टेशन और रोडवेज बसों में फुटकर पैसे न होने के चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। टिकट काउंटर पर किसी ने पांच और एक हजार के नोट लेने से मना तो नहीं किया लेकिन सौ-50 के नोट न होने से उन्होंने यात्रियों से फुटकर की मांग की।