रानी की सराय/लाटघाट। कोरोना वायरस से बचने के लिए केंद्र सरकार ने 21 दिन के लिए लॉक डाउन के आदेश दिए हैं। इससे लोगों को घर पर रहना पड़ रहा है। रोज खाने कमाने वाले को मुसीबत खड़ी हो गई है। कई परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी के लिए सोचना पड़ रहा है। ऐसे में कई लोगों ने अपना पुराना काम बंद कर नए तरीके के कार्य शुरू कर दिए हैं।
रानी की सराय में लगभग 20 साल से बिहार प्रांत के लोग किराए के मकान में रहते हैं। कबाड़ खरीद कर और उन्हें कबाड़ी की दुकान में बेच कर अपनी आजीविका चलाते हैं। रोज का कमाना और रोज खाना उनकी जिविका का साधन है। 25 मार्च से लाक डाउन के बाद पूरी तरह से काम ठप हो गया। जब रोजी-रोटी पर संकट आया तो इन लोगों ने सब्जी बेचने का काम शुरू कर दिया। इन दिनों में लगभग आधा दर्जन लोग सब्जी ठेले में लेकर गांव-गांव बेचने का काम कर रहे हैं। बिहार प्रांत के प्रमोद, चंदन, बीरबल, परमानंद आदि लोग इन दिनों गांव गांव में सब्जी बेच रहे हैं। चंदन और बीरबल ने बताया कि कबाड़ी का काम बंद होने से सब्जी का काम कर रहे ह़ैं। क्या करें परिवार का भरण पोषण तो करना ही है। लॉक डाउन में मिठाई की दुकान वाले भी प्रभावित हैं। दुकान बंद कर अब ये सब्जी बेच रहे हैं। पूछने पर बताया कि सब्जी बेचना मजबूरी हो गई है। मिठाई की दुकान बंद है। जीने के लिए पैसे की आवश्यकता है। परिवार के भरण पोषण के लिए सब्जी की दुकान खोल रखे हैं। पान की गुमटी लगाने वाले भी ठेले पर सब्जी दे रहे हैं। वहीं, कई लोगों ने राशन और होम डिलिवरी आदि का कार्य भी शुरू कर दिया है।