आजमगढ़। 27 जून 2012 से बंद चल रहे ईंट भट्ठे फिर से चालू हो सकेंगे। शासन ने ऐसे ईंट भट्ठों के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। ईंट भट्ठा संचालक को एक वर्ष के शुल्क का तीन गुना शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद ईंट भट्ठा संचालन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन्हें जल, वायु सहमति पत्र जारी करेगा। आजमगढ़ मंडल में 1444 ईंट भट्ठे हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप विश्वकर्मा ने बताया कि इसमें से 395 ईंट भट्ठा संचालकों ने विभाग ने भट्ठा संचालन की अनुमति ली है जबकि 945 ईंट भट्ठों को बंदी का आदेश है। इसके अलावा 104 ईंट भट्ठे बंद पड़े हुए। 27 जून 2012 की नियमावली में ईंट भट्ठों से एक किलोमीटर के दायरे में आबादी, बाग, धार्मिक स्थल नहीं होना चाहिए था जबकि एक ईंट भट्ठों से दूसरे ईंट भट्ठों की दूरी 800 मीटर रखी गई थी। 1500 रुपये वार्षिक शुल्क होता था। अब शासन ने तीन फरवरी 2026 को नई गाइडलाइन जारी किया है। इसके तहत पुरानी गाइडलाइन के पूर्व से बंद ईंट भट्ठे फिर से चालू हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि बंद पड़े ईंट भट्ठों के आसपास 800 मीटर की दूरी में कोई आबादी, बाग नहीं होना चाहिए साथ ही अगर आसपास दो ईंट भट्ठे हैं तो उनके बीच की दूरी एक किमी होनी चाहिए। ईंट भट्ठे को फिर से चालू करने के लिए निर्धारित एक वर्र्ष के शुल्क का तीन गुना (4500 रुपये) के हिसाब से अब तक का शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद विभाग उनको भट्ठा संचालन के लिए जल, वायु सहमति पत्र देगा।
27 जून 2012 के पूर्व से बंद चल रहे ईंट भट्ठों के फिर से संचालन के लिए शासन ने नईं गाइडलाइन जारी किया है। नईं गाइडलाइन के अंतर्गत आने वाले ईंट भट्ठों के संचालन की अनुमति दी जाएगी। उनको विभाग से अधिरोपित शुल्क जमा करना होगा। - प्रदीप विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।