आजमगढ़। लावारिस मृतकों का दाह संस्कार करने वाले भारत रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने रविवार को राजघाट पर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, कार्यालय पर ब्राह्मणों को दान देने के साथ ही भोजन करवा कर प्रार्थना की। संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि अगस्त 2013 से भारत रक्षा दल की ओर से जिले भर में पाए जाने वाले लावारिस मृतकों का दाह संस्कार किया जा रहा है।
लावारिस मरने वालों की भी सदगती हो जाए, उनको भी मुखाग्नि मिल जाए, उनका भी क्रिया कर्म हो जाए, इसके लिए हम लोग लगातार लगे हुए हैं। पहले लावारिस मृतकों के शरीर को पोस्टमार्टम के बाद तमसा नदी में फेंक दिया जाता था। यह सभी को विचलित कर देता था। तभी से हम लोगों ने तय किया कि अब हम लोग लावारिस को नदी में सड़ने के लिए नहीं डालने देंगे। तभी से संगठन द्वारा यह कार्य निरंतर किया जा रहा है। हिंदू धर्म की परंपराओं, मान्यताओं के अनुसार राजघाट पर ऐसे सभी लावारिस मृतकों का हम लोग दाह संस्कार करते हैं। प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष में वर्ष भर के लावारिस मृतकों का एक साथ सामूहिक आह्वान करके पिंडदान किया जाता है। पिंडदान में प्रमुख रूप से उमेश सिंह गुड्डू, आरपी श्रीवास्तव, जैनेंद्र चौहान और शक्तिशरण ने लावारिस का वारिस बनकर पिंडदान दिया। केशव प्रसाद सोनू, प्रदीप चौहान, रवि प्रकाश, राजन अस्थाना, मनीष कृष्ण, धर्मवीर, सुनील वर्मा, बृजेश मिश्रा, दुर्गेश श्रीवास्तव, जय किशन, पप्पू, जावेद अंसारी. डॉ. धीर जी, धनंजय अस्थाना, मनोहर प्रसाद, दीपक जायसवाल, प्रवीण कुमार गौड़, अनूप श्रीवास्तव, आलोक शर्मा, नसीम अहमद, हरिकेश विक्रम, मो. अफजल, छाया अग्रवाल, नीतू मिश्रा ,पुष्पांजलि गुप्ता, सरिता श्रीवास्तव, पंडित सौरभ मिश्रा रहे।