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हजारों ग्रामीणों के आवागमन का साधन बनी नाव

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लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी कहर बरपाने के बाद अब शिथिल पड़ती जा रही है। लेकिन नदी देवारावासियों को ऐसा दर्द देकर गई है जिससे उबरने में उन्हें पूरा वर्ष गुजर गया है। कुछ ऐसा ही बेलहिया पुल से आवागमन करने वालों का भी है।
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घाघरा के बाढ़ में इस वर्ष 2004 का 4400000 रुपये की लागत से बना पुल घाघरा की धारा में बह गया। पुल का निर्माण समाजवादी सरकार में तत्कालीन मंत्री रहे रामप्यारे सिंह द्वारा कराया गया था। जो 15 साल में ही बह गया। पुल बहने से हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन नाव से आना जाना होता है। महुला गढ़वल बांध से अजगरा, अजगरा मगरवी, आराजी अजगरा मगरवी, बेलहिया आदि गांव के लोग रोजमर्रा के काम के लिए हॉस्पिटल, बाजार, जिला मुख्यालय आदि जगहों को जाने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। वर्तमान में एक नाव चल रही है जिसके कारण आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के साथ आर्थिक दिक्कतें भी हो रही है। अकेले आदमी को पांच रुपये,साइकिल से 10 रुपये, मोटरसाइकिल से 20 रुपये भाड़ा देना पड़ता है। घाघरा नदी के दक्षिण सटे तटवर्ती गांव देवारा खास राजा, गांगेपुर, अचल नगर में कटान अभी जारी है। कृषि योग्य भूमि कटती ही जा रही है। अब तक हजारों एकड़ भूमि घाघरा में विलीन हो चुकी तो वहीं सैकड़ों घर भी घाघरा में समा चुके हैं। एसडीएम अरविंद कुमार सिंह से बताया कि जिनके घर कटे हैं उनके नाम लेखपाल द्वारा चिन्हित कर लिए गए हैं। उन्हें आवास के लिए जमीन आवंटित जल्दी कर दी जाएगी और जिन किसानों की जमीन घाघरा में विलीन हुआ है उसका भी मुआयना कराया जा रहा है। उसका भी उचित मुआवजा किसानों को मिलेगा।
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