आजमगढ़। हाल में संपन्न हुए पंचायत चुनाव ने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। जनता ने जिस तरह से राजनीतिक दलों को दरकिनार कर निर्दलियों पर भरोसा जताया है, उसने पार्टियों के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में खतरे की घंटे की बजा दी है। सपा का गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में भाजपा सपा से मात्र एक सीट पीछे और बसपा से एक सीट आगे है। ऐसे में सपा और बसपा को अबकी भाजपा चुनौती देने की स्थिति में है।
आजमगढ़ जनपद में 10 विधानसभा और दो लोकसभा क्षेत्र हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने 10 विधानसभा सीटों में से पांच पर कब्जा जमाया बजबकि जबकि बसपा को चार और भाजपा को एक सीट पर कामयाबी मिली। आजमगढ़ लोकसभा सीट पर सपा और लालगंज पर बसपा कायम है। हर पार्टी पंचायत चुनाव को 2022 के विधानसभा चुनाव की भूमिका के रूप में देख रही है। राजनीतिक दलों के समर्थित प्रत्याशियों को इस बार ज्यादा सफलता नहीं मिली है। जनता ने निर्दलियों पर ज्यादा भरोसा जताया है। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी उनके सहारे ही हासिल की जा सकती है। सगड़ी में बसपा की वंदना सिंह विधायक हैं। यहां से बसपा को जिला पंचायत सदस्य की दो सीट मिली है जबकि सपा व भाजपा खाली हाथ हैं। अपना दल ने एक सीट पर कब्जा जमाया है। गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा और बसपा को दो-दो सीटें मिली हैं। भाजपा और असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को एक-एक सीटें मिली हैं। अतरौलिया में सपा ने चार, भाजपा ने दो और कांग्रेस ने एक सीट जीती है। फूलपुर पवई में आप और राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल को एक-एक सीट मिली है। निजामाबाद में भाजपा ने दो सीटें हासिल की हैं। आजाद समाज पार्टी, सपा और बसपा एक-एक सीट पर ही रह गी हैं। सदर विधानसभा सीट में सपा दो सीटें मिली हैं जबकि बसपा के खाते में एक सीट आई। दीदारगंज विधानसभा क्षेत्र में बसपा और भाजपा दो-दो सीटों के साथ बराबरी पर हैं और सपा को एक सीट मिली है। लालगंज विधानसभा में सपा, बसपा, आजाद समाज पार्टी को एक-एक सीट और मेंहनगर में बसपा और भाजपा को एक-एक सीट मिली है। मुबारकपुर में सपा सभी पर भारी है और तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। यहां भाजपा को दो और बसपा को एक सीट मिली है।