आजमगढ़। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब वर-वधू की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि अब विवाह के पूर्व ही दोनों की बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज की जाएगी, जिसके बाद ही उन्हें सरकारी योजना का लाभ मिलेगा। यह नई व्यवस्था वर्ष के अंत तक लागू होने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए एक लाख रुपये प्रति जोड़ा खर्च करती है। इसमें कन्या के बैंक खाते में 51 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं, जबकि शेष राशि उपहार और विवाह आयोजन पर खर्च की जाती है।
इस आयोजन में अक्सर यह शिकायत मिलती रही है कि सामूहिक विवाह में वर या वधू के दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कर दिए जाते हैं। इसे रोकने के लिए शासन ने अब वर-वधू के आधार कार्ड के बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी ने बताया कि योजना की संशोधित गाइडलाइन अभी नहीं आई है। नवंबर से शादियों का आयोजन शुरू होगा। तब तक गाइडलाइन भी आ जाएगी और संबंधित कर्मचारियों को बायोमेट्रिक अटेंडेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा, साथ ही उसके लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर भी डाउनलोड किया जाएगा।