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Azamgarh News: बायो मेडिकल कचरा निस्तारण की व्यवस्था ध्वस्त, 117 में से 40 सरकारी अस्पतालों से ही संग्रह की व्यवस्था

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नगर के कूड़ेदान बाक्स में फेंका गया मेडिकल वेस्ट। संवाद - फोटो : Archive
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जिले में जैव चिकित्सकीय कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले में प्रतिदिन करीब 16 से 17 क्विंटल बायो मेडिकल कचरा निकलता है।
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इसके बावजूद इसके संग्रह और निस्तारण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। जिले के 117 सरकारी अस्पतालों में से केवल 40 से ही कचरा उठाया जा रहा है। वहीं, अगर निजी संस्थानों की बात करें तो इनकी हालत और खराब है।
जिले में संचालित 750 से अधिक निजी अस्पताल, क्लीनिक और प्रयोगशालाओं में से महज 500 से ही मेडिकल कचरा एकत्र किया जाता है। इससे 250 से अधिक संस्थानों का कचरा यहां-वहां फेंका जाता है।
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सीएमओ कार्यालय के अनुसार, जिले में 366 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि बड़ी संख्या में अवैध क्लीनिक भी चल रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सबसे खराब है, जहां केवल जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, 100 शैय्या अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से ही कचरा उठाया जाता है। बाकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाले संक्रमित कचरे के निस्तारण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
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सीमित वाहन और रोज उठान न होने से समस्या
जिले के 22 विकासखंडों में बायो मेडिकल कचरा संग्रह के लिए महज सात गाड़ियां लगाई गई हैं। इससे सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से नियमित रूप से कचरा उठाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल कचरे को सामान्य कूड़े में फेंकना गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरा पैदा करता है। इसमें इस्तेमाल की गई सिरिंज, दस्ताने, पट्टियां और संक्रमित सामग्री शामिल होती है। रानी की सराय, सगड़ी, मुबारकपुर, सठियांव, बिलरियागंज, निजामाबाद और लालगंज जैसे क्षेत्रों में भी यही स्थिति है।
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खुले में फेंका जा रहा संक्रमित कचरा
फरिहा क्षेत्र में सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को सड़कों के किनारे, कूड़ेदानों और नहर के किनारे खुले में फेंका जा रहा है। शारदा सहायक खंड-32 नहर के किनारे जगह-जगह मेडिकल कचरा पड़ा दिखाई देता है। इसमें इस्तेमाल की गई इंजेक्शन की सीरिंज सहित अन्य चिकित्सकीय सामग्री भी शामिल है। खुले में पड़े इस कचरे से दुर्गंध फैल रही है और आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। यह कचरा राहगीरों, बच्चों और पशुओं में चोट और संक्रमण का खतरा पैदा करता है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लापरवाही
बरदह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल कचरे का उठान न होने से इसे प्रतिदिन इधर-उधर फेंक दिया जाता है। अस्पताल के पीछे और गेट के बगल में दवाइयां और कूड़े का ढेर जला दिया जाता है। अधीक्षक सोमेश रंजन मिश्रा ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की गाड़ी आती है और कचरा लेकर जाती है। अतरौलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी मेडिकल कचरा बिखरा रहता है। यहां पुराने शौचालय में कचरा फेंककर जला दिया जाता है और परिसर में कबाड़ में पड़ी एंबुलेंस में भी कचरा डालकर आग लगा दी जाती है। अधीक्षक डॉ. हरिश्चंद्र मौर्य ने बताया कि यहां प्रतिदिन सिलिकॉन बायोटेक प्रा.लि. की गाड़ी आती है और मेडिकल कचरा लेकर जाती है।
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निस्तारण के नियम
कचरे का वर्गीकरण : अस्पताल पर ही कचरे को सही रंग के डिब्बे में अलग करना अनिवार्य है।
बारकोडिंग प्रणाली : कचरे के थैलों पर बारकोड लगाना जरूरी है, ताकि ट्रैक किया जा सके।
भंडारण समय : कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल परिसर में नहीं रखा जा सकता।
परिवहन : इसे केवल अधिकृत और ढकी हुई गाड़ियों के जरिए ही कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी भेजा जाता है।
प्रतिबंध : क्लोरीन युक्त प्लास्टिक की थैलियों और दस्तानों के इस्तेमाल पर रोक है।
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निस्तारण की प्रक्रिया और आंकड़े
सिलिकॉन बायोटेक प्रा. लि. के क्षेत्रीय प्रबंधक रूपेश त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 40 सरकारी अस्पताल और करीब 500 निजी अस्पताल, प्रयोगशालाएं और क्लीनिक से प्रतिदिन बायो मेडिकल कचरे का संग्रह किया जाता है। इसके लिए जिले में सात गाड़ियां लगाई गई हैं, जो संग्रह करती हैं। इन सभी अस्पतालों का अनुबंध है। उन्होंने बताया कि मार्टीनगंज में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण केंद्र बनाया गया है, जहां कचरे को रेड, ब्लू, यलो और व्हाइट श्रेणियों में रखा जाता है। प्रतिदिन कुल 1625 किलोग्राम मेडिकल कचरा निकलता है, जिसमें 400 किलोग्राम रेड, 300 किलोग्राम ब्लू, 900 किलोग्राम यलो और 25 किलोग्राम व्हाइट कचरा शामिल है। सरकारी अस्पतालों से 60 किलोग्राम रेड, 50 किलोग्राम ब्लू, 200 किलोग्राम यलो और 3 किलोग्राम व्हाइट कचरा निकलता है।
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जिले के सभी निजी और सरकारी अस्पतालों से कंपनी का अनुबंध है। यहां प्रतिदिन गाड़ी आती है और बायो मेडिकल वेस्ट ले जाती है। सरकारी सहित निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। इसमें जहां भी बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण होता हुआ नहीं मिलेगा, कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एनआर वर्मा, सीएमओ।
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