1993 के विधानसभा चुनाव में कफन गले में बांध कर प्रचार करते पूर्व विधायक स्व. राजबली यादव।
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आजमगढ़। बात 1993 की है जब दुर्गा प्रसाद यादव तीन बार से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। लगातार चौथी बार उनकी दावेदारी प्रबल मानी जा रही थी। तब बसपा के प्रत्याशी राजबली यादव ने ‘एक वोट की भीख दो या कफन दो’ की मार्मिक अपील करके चुनाव की दिशा ही पलट दी थी। लोगों ने उनको वोट भी दिया और धन भी दिया।
नगर के बदरका मुहल्ला निवासी रामनुज दुबे ने बताया कि आजमगढ़ सदर सीट से दुर्गा प्रसाद यादव नौ बाद चुनाव लड़ चुके हैं और उनको आठ बार जीत हासिल हुई है। बीच में एक बार उन्हें पटखनी देने वाले राजबली यादव हैं। 1985, 1989 और 1991 का चुनाव लगातार जीतकर दुर्गा प्रसाद यादव चौथी बार मैदान में उतरे थे। उनकी दावेदारी प्रबल मानी जा रही थी। ज्यादातर लोगों को लग रहा था कि वह चौथा चुनाव भी आसानी से जीत जाएंगे। बहुजन समाज पार्टी ने उनके मुकाबले अधिवक्ता राजबली यादव को चुनाव मैदान में उतारा। मैदान में उतरने के बाद राजबली यादव ने घर-घर घूमना शुरू किया लेकिन बात बनती नजर नहीं आ रही थी। तब उन्होंने एक तरकीब निकाली और कंधे पर कफन टांगकर घूमने लगे। वह लोगों के दरवाजे पर जाते और उनसे एक वोट की भीख मांगते। साथ ही कहते थे कि आप वोट नहीं दे सकते तो एक कफन दे दीजिए। पहले तो लोगों ने इसे मजाक में लिया। उनके इस चुनावी पैंतरे की खूब चटखारे लेकर चर्चा होती थी। मगर उनका यह दांव काम कर कर गया। धीरे-धीरे राजबली यादव का यह चुनाव प्रचार रंग लाने लगा। लोग उनके दरवाजे पर पहुंचने पर उनकी झोली में चुनाव लड़ने के लिए नोट भी डालने लगे। हवा बदलती गई। जिस दुर्गा को लोग अपराजेय मानकर रहे थे जनता ने उनके खिलाफ राजबली की चुनौती कड़ी हो गई। परिणामों की घोषणा हुई तो उसमें राजबली यादव को विजयी घोषित किया गया।