हजरत मोहम्मद के पहले उत्तराधिकारी हजरत अली की यौमे विलादत (जन्मदिन) सोमवार की रात फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान इमामबाड़ों में अली की शान में कसीदे पढ़े गए। देर रात तक महफिलें चलीं। कई जगहों पर हजरत अली की विलादत पर केक कटे गए।
शायर कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां स्थित इमाम बारगाह मेंहदी हसन में सरवत बानो की ओर से हजरत अली की यौमे विलादत पर ख्वातीनों ने महफिल सजाई। देर रात तक अली के शान में कसीदे पढ़े गए। इस दौरान महफ़िल स्थल को झालरों और रंगीन गुब्बारों से सजाया गया था। जाकिरा निकहत फातमा ने कहा कि हजरत अली इल्म का खजाना थे। उनका जन्म आज ही के दिन यानी 13 रजब को मक्का शहर में खुदा के घर खाने काबा में हुआ था। वो मजलूमों की आवाज बने और उन्हें इंसाफ दिलाया। जाकिरा तमसील फातिमा ने कहा कि आज हजरत अली की राह पर चलते हुए मजलूमों की आवाज बनने की जरूरत है। संयोजक सरवत बनो ने सभी को शुक्रिया पेश किया। इसी क्रम में चमावां, दसमड़ा, माहुल, कुशलगाव, खरपड़ा गांव, नाहरपुर, डीघिया, कन्दरी में महफिलें आयोजित की र्गइं।