बस से उतरने के बाद पैदल घर जाते यात्री।
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आजमगढ़। लाकडाउन ने रोजी रोटी की तलाश में गैर प्रांत में रहने वालों की हालत खराब कर दी है। काम क्या बंद हुआ अपना घर याद आने लगा। साधन भी नहीं मिला तो सिर पर गृहस्थी का सामान लादे और गोद में बच्चों को लेकर चल पड़े घर के लिए। यह नहीं पता कैसे पहुंचेंगे लेकिन एक आस कि घर पहुंचने पर सब ठीक हो जाएगा।
कोरोना के खिलाफ लाक डाउन का सबसे बड़ा खामियाजा रोज कमाने और खाने वाले लोगों पर पड़ा है। लेकिन रोजी रोटी की तलाश में अपने गांव को छोड़कर दूसरे प्रांतों में परिवार के साथ बसने वाले लोगों को इस वक्त सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। गए थे। लाक डाउन ने जब उनकी रोज की आमदनी को बंद कर दिया तो लोगों के सामने गांवों की ओर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं रहा। वाहनों का संचालन बंद होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। जब वाहन नहीं मिला तो घर गृहस्थी के सामानों की पोटली बनाकर सिर पर रखी और नन्हीं सी जान को गोद में उठाए निकल पड़े अपने गांव पहुंचने की आस लिए। ऐसे लोगों का जमावड़ा सोमवार को रोडवेज परिसर में देखने को मिला। प्रदेश सरकार द्वारा बस का संचालन शुरू होने से उन्हें काफी सहूलियत मिली। लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी थे जिन्हें बस नहीं मिली तो वह ट्रक, बाइक, पैदल आदि का सहारा लेकर चलते रहे। रोडवेज परिसर में पहुंचे बहुत से लोग ऐसे थे जिनके पास खाने के भी पैसे थे। लेकिन भला हो स्वयंसेवी संगठनों का जो इनके लिए भोजन आदि की व्यवस्था में लगे हुए थे। ऐसा भी देखने को मिला कि बच्चों की हिम्मत चलते चलते जवाब दे गई तो पिता बोला बेटा बस थोड़ी दूर और। देश के किसी किसी राज्य में तो लोग सौ सौ किलोमीटर तक पैदल चले। सभी को बस घर पहुंचने की जल्दी है। लेकिन वर्तमान स्थिति सबके सामने है। ये बढ़े कदम कहां थमेंगे, फिलहाल कोई नहीं जानता।