बोले लोग
पुल से जाने के लिए 50 से 60 रुपये देने पड़ते हैं। पुल का निर्माण होता तो सुविधा होती और आपातकाल में महिला मरीज को घुमाकर ले जाने में समय अधिक लगता है, ऐसे में दवा के अभाव में मौत हो जाना आम बात है। यह अस्थायी व्यवस्था लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
-अर्पित सिंह
रात में इस चह से यात्रा करने में डर लगता है। रात के समय किसी हादसे की जानकारी भी नहीं मिल पाती। लेकिन, घर पहुंचना है तो यह शार्टकट रास्ता होने के कारण इसका उपयोग करना मजबूरी होती है।
-विजय कुमार
इस ''चह'' से गुजरते समय लोग अक्सर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। यहां देखरेख करने वाले लोग हालांकि सहायता करते हैं, लेकिन यह समाधान नहीं है। यह स्थिति यात्रियों के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। -प्रशांत भारती।
पुल के निर्माण से बहुत आसानी होती। इस समस्या को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन भी किए गए हैं। लेकिन हमारी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
-समावती देवी
बोले संचालक
इसे बनाने में डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च होते हैं। हम बांस-बल्ली से जोड़कर इसे जनसेवा की भावना से बनाते हैं और किसी को परेशान नहीं करते हैं। हालांकि, यात्रियों को हर बार नदी पार करने के लिए 50 से 60 रुपये का शुल्क देना पड़ता है। यह शुल्क कई बार लोगों के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन जाता है। बाढ़ के बाद इसे दोबारा बनाने में भी काफी खर्च आता है। इसलिए लेना पड़ता है। -विजय साहनी, चह संचालक