आरोप है कि डीआईओएस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी ने उनसे और डीआईओएस के बीच मध्यस्थता की। आरोप है कि उसी के माध्यम से डीआईओएस ने 25 लाख रुपये लेकर भुगतान शुरू किया। डॉ. प्रिया और सौरभ तिवारी ने आरोप लगाया कि एक माह का भुगतान होने के बाद डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने 17 लाख रुपये और मांग करते हुए फिर से वेतन रोक दिया। वेतन भुगतान होने का हवाला देते हुए शिक्षक फिर से कोर्ट चले गए। कोर्ट ने फिर से वेतन भुगतान करने के लिए आदेश दे दिया।
उपेंद्र कुमार एक माह के लिए अवकाश पर गए। इसी बीच डीआईओएस का प्रभार संभाल रहे वीरेंद्र प्रताप सिंह ने भुगतान शुरू कर दिया। अवकाश से आने के बाद उपेंद्र कुमार फिर से चार्ज संभाल लिए और वेतन अवरुद्ध कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर शिक्षक के पुत्र सौरभ तिवारी और डॉ. प्रिया तिवारी संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में पहुंचे तो संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर, डीआईओएस उपेंद्र कुमार और वीरेंद्र प्रताप सिंह मौजूद मिले। शिक्षक के पुत्र सौरभ और डॉ. प्रिया हंगामा शुरू कर दिए। जानकारी होने पर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच और दोनों पक्षों को समझाने में जुट गए।
वेतन भुगतान न होने के मामले में शिक्षक के पुत्र और पुत्री यहां आए थे। उन्होंने डीआईओएस पर 25 लाख रुपये घूस लेने का आरोप लगाया है। साथ ही 17 लाख और न देने पर वेतन अवरुद्ध कर देने का भी आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मामले की जांच की जाएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -नवल किशोर, संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़
कोर्ट के आदेश पर वेतन अवरुद्ध था। इसके लिए परिषद से मार्गदर्शन मांगा गया था। उनके द्वारा पैसे लेने का आरोप लगाया गया है जो निराधार है। -उपेंद्र कुमार, डीआईओएस आजमगढ़