जिले में जहां एक तरफ एलोपैथिक अस्पताल चमक रहे हैं, वहीं आयुर्वेदिक अस्पतालों की हालत खस्ता है। अस्पतालों में चिकित्सक से लेकर फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्ड बॉय की भारी कमी है। वहीं अन्य संसाधनों और दवाओं की कमी भी देखी गई। आयुर्वेदिक व यूनानी विभाग के अनुसार, जिले में कुल 60 अस्पताल संचालित हैं। इनमें तीन निजी भवनों में संचालित होते हैं, जबकि छह अस्पतालों का संचालन निशुल्क भवनों में हो रहा है। विभाग का दावा है कि रोज करीब 1,500 मरीजों की ओपीडी होती है और सभी दवाएं उपलब्ध हैं। शुक्रवार को 12 अस्पतालों की हुई पड़ताल में कहीं दो कमरों में चार बेड का अस्पताल संचालित होता मिला तो कहीं अस्पताल में ताला लटका मिला। अधिकांश जगह दवाओं की कमी देखी गई।
अतरौलिया के गजधरपट्टी भेदौरा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में शुक्रवार की दोपहर ताला लटका मिला। यहां दवा कराने के लिए आए मरीजों ने बताया कि यह अस्पताल अक्सर बंद रहता है। यहां एक-दो दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन अन्य दवाएं बाहर से ही लेनी पड़ती हैं। वहीं, ठेकमा ब्लॉक क्षेत्र के सरायमोहन में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल महज दो कमरों में चल रहा है। एक कमरे में स्टोर, जबकि दूसरे कमरे में ओपीडी चलती है। यही हाल लाटघाट क्षेत्र के हाजीपुर, लाटघाट और रौनापार स्थित अस्पताल का है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र होने के बावजूद यहां अक्सर चिकित्सक नदारद रहते हैं। बृहस्पतिवार की दोपहर हाजीपुर में अस्पताल बंद पाया गया था। इसी प्रकार मार्टीनगंज के दुबरा में किराये के भवन में अस्पताल संचालित है। यहां इक्का-दुक्का मरीज आते हैं। सगड़ी क्षेत्र के अनजान शहीद में चार बेड के संचालित अस्पताल का भवन जर्जर हो गया है।
कप्तानगंज : डॉक्टर समेत चार कर्मचारी मिले मौजूद
तेरही गांव स्थित श्री बृजपाल इंटर कॉलेज के पश्चिम में आयुष्मान आरोग्य मंदिर राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में डॉक्टर सहित चार कर्मचारी मौजूद मिले। डॉ. अमरजीत पाल ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 मरीज दवा लेने आते हैं। अस्पताल पहुंचने का रास्ता बहुत खराब है।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी
चिकित्साधिकारी — 05
फार्मासिस्ट — 18
स्टाफ नर्स — 03
चतुर्थ श्रेणी कर्मी — 44
वार्ड बॉय— 22
एएनएम सेंटर में चल रहा आयुर्वेदिक अस्पताल, बेड की सुविधा नहीं
रानी की सराय। ऊंची गोदाम स्थित एएनएम सेंटर में आयुर्वेदिक अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। यहां फिलहाल केवल ओपीडी की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल के लिए रुदरी गांव में जमीन चिह्नित किए जाने के बावजूद अब तक भवन निर्माण और मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में बेड की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वर्तमान में एएनएम सेंटर में ही ओपीडी संचालित हो रही है। यहां कोई मरीज नहीं मिला।
दोपहर में आयुर्वेदिक अस्पताल पर लटका मिला ताला
अतरौलिया। क्षेत्र के गजधरपट्टी भेदौरा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में शुक्रवार की दोपहर ताला लटका मिला। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का भी अभाव दिखा। यहां मिले शीलवंत, बजरंग बहादुर, दयाराम और राणा प्रताप ने बताया कि अस्पताल खुला रहने पर लोगों को स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिलती है, लेकिन बंद होने पर मरीजों को उपचार के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल अक्सर बंद रहता है। यहां कुछ दवाएं तो मिल जाती हैं और कुछ बाहर से लेनी पड़ती हैं।
दो कमरों के निजी भवन में चलता मिला अस्पताल
ठेकमा। ब्लॉक मुख्यालय के बगल स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यहां निजी भवन में चिकित्सक डॉ. अपूर्वा और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। चार बेड के अस्पताल के नाम पर मात्र दो कमरों में अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। एक कमरे में दवाओं का स्टोर है, जबकि दूसरे कमरे में चिकित्सक मरीजों का उपचार करती हैं।
यहां प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं होने से भी परेशानी रहती है। चिकित्सक डॉ. अपूर्वा ने बताया कि अस्पताल के लिए निजी भवन निर्माण का प्रस्ताव बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद अस्पताल के लिए बेहतर भवन और सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
आयुर्वेदिक अस्पताल के भरोसे इलाज नहीं हो पाएगा। आज दोपहर में खांसी की दवा लेने गया था, तो यहां ताला ही बंद मिला। अब प्राइवेट अस्पताल से ही दवा लेनी पड़ेगी। -योगेंद्र सिंह, अतरौलिया।
अस्पताल अक्सर बंद रहता है। पता नहीं कब डॉक्टर सहित कर्मचारी आते हैं और जाते हैं। यहां दवाओं का भी अभाव रहता है। कुछ ही दवाएं यहां से मिल पाती हैं। -तहजीब आलम, अतरौलिया।
वर्जन
जिले में तीन अस्पताल निजी भवन में संचालित हो रहे हैं। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बीते वर्षों में कई अस्पतालों की स्वीकृति मिली थी। अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं, बड़े पैमाने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का अभाव है। -डॉ. राजेश कुमार यादव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी आजमगढ़।
अतरौलिया के गजधरपट्टी भेदौरा अस्पताल में बंद ताला। संवाद