सिधारी। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा आजमगढ़ इकाई की ओर से हरबंशपुर स्थित एक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी की शुरूआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।
गायिका सपना बनर्जी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। कवि गोष्ठी की शुरुआत में डॉॅ शशि भूषण प्रशांत ने ‘यह सफ़र किस मोड़ पर है, सिर्फ गहरा सा कुहासा, छूटना बस छूटना है रेत सा सब कुछ फिसलता’ सुनाया। दिनेश श्रीवास्तव दानिश (संस्था अध्यक्ष) ने ‘हमारे बीच की उलझन कभी सुलझती नहीं, मगर हक़ीकतन उलझन की बात रहती नहीं’ सुनाकर वाहवाही लूटी। संस्था संयोजक विजयेंद्र श्रीवास्तव करुण ने ‘मैं कहता हूं प्रेम का घन जग कहता बादल है, या तो मैं दीवाना हूं या दुनिया पागल है’ सुनाया। रत्नेश राय (संस्था मंत्री) ने ‘दिल में तेरी ही बस तस्वीर सजा रखा हूं’ मगर आईना दिल को अपने बनाऊं कैसे, सुनाया। संतोष पांडे (संस्था कोषाध्यक्ष) ने ’गुलशन तलाश कर नहीं सेहरा तलाश कर, जिंदा रखे जो प्यास वो पेशा तलाश कर... सुनाया। डॉ आशा सिंह ने ‘रीत कुछ लीक से हटकर तो चलाई जाए, बात मुश्किल ही सही मुमकिन तो बनाई जाए, सुनाया। इसके बाद संस्था उपाध्यक्ष शालिनी राय ने ‘पाप का हो हिसाब कैसे, पुण्य पर प्रतिवाद कैसे, प्रेम को समझा कलंकित, प्रेम है अपराध कैसे? सुनाया। कवि रुद्रनाथ चौबे रुद्र ने ‘थिरकन लगते पांव हमारे, जब अंतर्धुन बजती है, रह-रह अनुपम याद पुरानी, अंतर्मन को मथती है, सुनाया। इसी प्रकार डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी, हरिहर प्रसाद पाठक, सुरेंद्र सिंह चांस, घनश्याम यादव, अशोक यादव, बृजबाला, अनुपम पांडे अनहद, जन्मेजय पाठक, डॉ. मोनिका शर्मा ने भी रचनाओं की प्रस्तुति दी। अध्यक्षता पंडित हरिहर पाठक तथा संचालन विजयेंद्र श्रीवास्तव करुण ने किया।