आजमगढ़। जिले में 72 हजार प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में भी अनियमितिता हुई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने तत्कालीन डायट प्राचार्य और तीन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा था।
कर्मचारियों के निलंबन की संतुति की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब शासन की ओर से फिर दस्तावेज तलब किए जा रहे हैं। तत्कालीन डायट प्राचार्य और कई कर्मचारियों कार्रवाई की तलवार लटकी है।
72825 हजार प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती के तहत जिले में 2500 शिक्षकों की भर्ती होनी थी। टैट की मेरिट के आधार पर भर्ती हुई थी। चयन सूची में डायट की ओर से ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया था, जो कि काउंसलिंग डाटा में नहीं थी।
मूल आवेदन में विकलांग न होने पर भी काउसलिंग डाटा में उन्हें विकलांग दिखाकर चयन कर लिया गया था। ऐसे लोग भी थे जो मिरट में थे, लेकिन चयन सूची में उन्हें बाहर कर दिया गया था। आरक्षण में भी गड़बड़ी की गई ती। टैट के नंबर के नंबर भी गलत चढ़ाए गए थे।
काउंसलिंग डाटा में अभ्यर्थियों के श्रेणी को भी गलत फीड किया गया था। लिंग और वर्ग में भी गड़बड़ी की गई थी। इससे चयन सूची गलत निकल रही थी। पांच चयन सूची ऐसे ही गलत डाटा पर निकला दिया गया।
छठवीं चयन सूची निकलने पर तत्कालीन सीडीओ महेंद्र वर्मा ने इसकी परीक्षण की जिम्मेदारी अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह को सौंप दी। परीक्षण में सभी कमियां निकल कर सामने आ गई। इसके बाद पिछले पांच परिणामों को संशोधित किया गया।
इसके बाद अगली चयन सूची निकाली गई। रिपोर्ट के आधार तत्कालीन जिलाधिकरी सुहास एलवाई ने इसे गंभीर अनियमितिता का जिम्मेदार मानते हुए आरोप पत्र के साथ तत्कालीन डायट प्राचार्य हरिशचंद्र नाथ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को भेजी थी।
इसके बाद तत्कालीन डायट प्राचार्य हरिश्चंद्र नाथ की ओर से विभाग में कार्यरत पटल सहायक राजेश यादव, सहायक अध्यापक संदीप कुमार और वृजदेव यादव को अनियमितिता के लिए जिम्मेदार बताते हुए निलंबन की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट संयुक्त शिक्षा निदेशक को भेजी थी। प्रमुख सचिव की ओर से तत्कालीन डायट प्राचार्य हरिशचंद्र नाथ को आरोप-पत्र भेजकर जवाब मांगा गया था, लेकिन किसी भी आरोपी पर कार्रवाई नहीं हुई।