जिले में ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्रेशन (अपार आईडी) का कार्ड बनाने में लापरवाही देखने को मिल रही है। हालत यह हैं कि जिले में अभी तक लगभग 70 प्रतिशत बच्चों की अपार आईडी कार्ड ही नहीं बन पाया है। यह हालत तब हैं जब शासन से लेकर बड़े अधिकारी इस मामले में लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सरकार कीओर से छात्र-छात्राओं की अपार आईडी बनाई जा रही है। अपार आईडी भारत के सभी छात्रों के लिए एक विशेष पहचान प्रणाली है। यह एक 12 अंकों का कोड होता है जिसके जरिये छात्र की हर शैक्षणिक जानकारी उसके अंदर होती है। इसे बनाने के लिए स्कूल के शिक्षकों की जिम्मेदारी है लेकिन इस जिम्मेदारी को शिक्षक कितना निभा रहे हैं यह आंकड़ों को देखकर ही पता चल जा रहा है। हकीकत यह हैं कि अभी भी जिले में 70 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की अपार आईडी कार्ड नहीं बन पाया है।