शहर के जामा मस्जिद में अलविदा जुमे की नमाज अदा करते मुस्लिम बंधु।
भीषण गर्मी की तपिश होने के बावजूद रोजेदारों में रमजान का आखिरी जुमा (अलविदा जुमा) की नमाज पढ़ने का जज्बा कायम रहा। लोगों ने बड़ी ही अकीदत के साथ शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी ईद की तरह अलविदा जुमा की नमाज अदा की। इस दौरान शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं।
नगर क्षेत्र के जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग मस्जिद में स्थान पाने के लिए नमाज के समय से पहले ही घर से चल दिए गए। बड़ों के साथ छोटे बच्चों की संख्या काफी थी। नए कपड़ों पर लगे इत्र की खुशबू से सरा आलम गमक उठा। नमाज शुरू होने से पहले जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना इंतखाब आलम कासमी ने अलविदा जुमा की नमाज, रमजान के दौरान पड़ने वाली शबेकद्र की रात की अहमियत, जकात और फितरे की रकम दिए जाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शबेकद्र की एक रात की इबादत हजार रात की इबादत के बराबर है।
उन्होंने कहा कि रमाजनुल मुबारक में निकाले गए जकात से आप की दौलत पाक हो जाती है। फितरे की रकम को ईद की नमाज के पहले निकाल देना चाहिए। इसके बाद लोगों ने खुतबा सुना और नमाज अदा कर अमनो-अमान की दुआ मांगी। जामा मस्जिद में नमाजियों की इतनी भीड़ थी कि मस्जिद से बाहर निकलने में 15 से 20 मिनट लग जा रहे थे। जामा मस्जिद और दलालघाट की मस्जिद शहर की बड़ी मस्जिदों में शामिल है।
इस दौरान जामा मस्जिद पर नगर पालिका परिषद के चेयरमैनी का चुनाव लड़ने वाले नेताओं ने नमाजियों से हाथ मिलाकर अलविदा जुमा की नमाज की बधाई दी। इसी प्रकार दलालघाट स्थित मस्जिद मस्जिद, बागमीरपेटू की मस्जिद, टेढ़िया मस्जिद, मदरसा जामियतुर्रशाद की मस्जिद, बदरका मस्जिद, कटरा की मस्जिद, सिधारी मस्जिद नमाजियों से भरी रही। नमाज के दौरान ही शहर इमाम द्वारा विभिन्न मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़े जाने के समय का एलान भी किया। इस दौरान हर मस्जिदों पर पुलिस बल तैनात रहा। नगर पालिका परिषद द्वारा हर मस्जिदों के आसपास सफाई व्यवस्था कराए जाने के साथ ही मस्जिदों के पास वजू करने के लिए पानी का टैंकर रखवाया गया था।