जिला अस्पताल में भर्ती एक मरीज का इलाज न कर डाक्टर उसे छोड़ कर चलते बने। कारण जांच में युवा मरीज को एड्स की पुष्टि हुई थी। वह सामान्य रोगियों के साथ ही सर्जिकल वार्ड में पड़ा है। उधर, खून की जांच में लैब कर्मचारी की लापरवाही उजागर होने पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने कर्मचारी से जवाब तलब किया है।
अस्पताल में भर्ती एचआईवी पीड़ित युवक निजामाबाद थाना क्षेत्र का रहने वाला है। बीते नौ अप्रैल को वह घायल हो गया। पैर में गंभीर चोट लगने के कारण उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के डाक्टर केके बरनवाल ने आपरेशन करने के लिए उसके खून की जांच कराई। रिपोर्ट नार्मल आने पर डाक्टर उसका आपरेशन करने के लिए ओटी में ले गए। लेकिन अंदर जाने के बाद युवक ने डाक्टर को एड्स होने की जानकारी दी इस पर डाक्टर ने आपरेशन रोक दिया।
साथ ही अस्पताल में हुई जांच में सब कुछ सामान्य मिलने की रिपोर्ट पर उन्होंने सवाल उठाया। बाद में डाक्टर ने मरीज के खून की जांच बाहर कराई। इस दौरान रिपोर्ट पाजिटिव आई। इसके बाद से युवक को कोई पूछने वाला नहीं है।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. बी राम ने बताया कि एचआईबी पीड़ित मरीजों को सामान्य वार्ड में रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि खून की जांच में कभी-कभी स्लाइड की गड़बड़ी से रिपोर्ट में अंतर आ जाता है। बहरहाल लैब कर्मचारी से जवाब मांगा गया है।