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अगड़े, पिछड़े, मुस्लिमों का दिल जीतने का प्रयास

Sun, 28 Aug 2016 11:45 PM IST
शैलेंद्र मणि त्रिपाठी/आजमगढ
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मायावती की रैली
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मिशन 2017 के ऐन पहले मंडलीय रैली के बहाने बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार विधानसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया। पूर्वांचल में बसपा की यह पहली चुनावी रैली है जिसके जरिए आजमगढ़, गोरखपुर और बस्ती मंडल के बसपा पदाधिकारियों ने ताकत का एहसास कराया। प्रदेश के पूर्वी इलाके में यह रैली ऐसे समय पर हुई है जब बसपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ कर विपक्षी दलों का हाथ थाम लिया।
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ऐसे लोगों ने बसपा में टिकट बेचे जाने के आरोप भी लगाए। ऐसे में पार्टी मुखिया ने न सिर्फ लोगों में भ्रम की स्थिति दूर करने का प्रयास किया बल्कि भाजपा, कांग्रेस और सपा की पोल खोलते हुए अगड़े, पिछड़े तथा मुस्लिमों को साधने की कोशिश भी की।
उन्होंने कहा कि बसपा से निकले लोगों की ओर से टिकट बेचने संबंधी आरोप निराधार और झूठे हैं। सच तो यह है कि पारिवारिक स्वार्थ में काम करने वाले ऐसे लोग पार्टी को खोखला बनाने में लगे थे और उनके निकलने से पार्टी की गंदगी दूर हुई है। 
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अपने एक घंटे के संबोधन में उन्होंने सबसे अधिक भाजपा को आड़े हाथों लिया। कहा कि आरएसएस के बताए राह पर चल रही केंद्र की भाजपा सरकार प्रदेश में सत्ता में आने के लिए कुछ भी कर सकती है। मुसलमानों से हमदर्दी जताते हुए कहा कि आतंकवाद पर मुसलमानों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। कांग्रेस ने केंद्र में शासन के दौरान मुस्लिमों को दस फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी जो संविधान में संशोधन के बिना संभव नहीं है।

यह केवल एक छलावा भर है। उन्होंने राहुल बेमुला के मामले को भी उठाया। कहा कि बसपा अगड़ों, पिछड़ों, मुस्लिम समेत हर वर्ग की हिमायती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों के सहारे हर वर्ग के लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया। महिला उत्पीड़न के मामलों को उठा कर बड़ी संख्या में जुटी महिलाओं का विश्वास जीतने की कोशिश की वहीं मुस्लिमों को भरोसे में लेने का प्रयास किया।

आमजन को महंगाई, बेरोजगारी बढ़ने की याद दिलाई तो बाढ़ की विभीषिका झेल रहे पूर्वांचल की जनता को अपने शासन की याद दिलाने से भी वे नहीं चूकीं कहा कि प्रदेश के कई जिले बाढ़ की चपेट में है लेकिन इस समस्या पर केंद्र और प्रदेश की सरकार गंभीर नहीं है। जब हमारी सरकार थी तो बाढ़ आने के पहले नदियों, नहरों की स्थिति दुरुस्त कर ली जाती थीं। 
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