सख्ती के बाद चोरी छिपे हो रहा बालू का खनन
शासन के निर्देश पर तहसील प्रशासन की सख्ती के बाद धड़ल्ले से हो रहे बालू और मिट्टी खनन पर अंकुश लगा है लेकिन लाटघाट क्षेत्र में घाघरा तट पर अब भी रात में चोरी छिपे बालू का खनन हो रहा है। अब तक जो भी कार्रवाई हुई है उनमें अधिकतर तहसील प्रशासन की ओर से की गई है। खनन विभाग की स्थिति यह है कि मात्र दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।
लाटघाट क्षेत्र के दियारा इलाके में घाघरा के किनारे वर्षों से सफेद बालू खनन का काम होता रहा है। इसको लेकर वर्चस्व की लड़ाई चलती रही है। इस धंधे में लिप्त लोगों की शासन तक पैठ रही है लेकिन भागता की सरकार बनने के बाद अब उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सरकार के निर्देश के बाद अवैध खनन के खिलाफ ताबड़तोड़ कारवाई हुई। परिणाम यह रहा कि अब धड़ल्ले से सफेद बालू के खनन पर अंकुश लगा है लेकिन रात में चोरी छिपे खनन का सिलसिला अब भी जारी है।
सफेद बालू की काली कमाई से जुड़े लोगों के बीच कई बार भिड़ंत भी हो चुकी है। इस अवैध धंधे से जुड़े लोगोें का शासन और प्रशासन में गहरी पैठ रही है जिसके चलते वे बेखौफ होकर खनन करते रहे हैं। खास बात यह है कि यह क्षेत्र इतना लंबा है कि प्रशासन की रोक के बाद भी अवैध खनन पर लगाम नहीं लग पा रहा है। घाघरा नदी के किनारे स्थित महुला से लेकर महराजगंज तक दर्जनों ऐसी जगहें हैं, जहां खनन माफियाओं द्वारा चोरीछिपे खनन किया जाता है। यह सब स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से किया जाता है।
क्षेत्र के रोशनगंज, पूर्णिया, सिंहगढ़, आराजी देवारा, इस्माइलपुर, हैदराबाद आदि जगहों पर खनन होता रहा है लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सख्ती से इस पर लगाम जरूर लगी है लेकिन अभी भी कुछ जगहों पर खनन का कार्य जारी है। वहीं, जनपद का खनन विभाग सिर्फ नाम का विभाग है। विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। इसलिए अवैध खनन के खिलाफ जो भी कार्रवाई होती है। वह तहसील और थाना स्तर के अधिकारियों और पुलिस द्वारा ही की जाती है।