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सहूलियत मिली तो फिर ब्लैक पॉटरी के धंधे को अपनाया

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निजामाबाद की ओडीओपी के तहत चयनित हस्तशिल्प कला कृति ब्लैक पॉटरी। - फोटो : AZAMGARH
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विश्व में विशिष्ट पहचान बनाने वाली निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया गया है। ब्लैक पॉटरी के उद्यम को ओडीओपी के तहत सहूलियत और सुविधाएं मिलने से इस उद्योग को संजीवनी मिली है। सरकार इस उद्योग को बढ़ावा देने का हरसंभव प्रयास कर रही है। यही वजह है कि ब्लैक पॉटरी के कार्य को छोड़ चुके शिल्पकारों ने अब फिर इस धंधे को अपना लिया है।
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निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी विश्वविख्यात है। एक जिला एक उत्पाद के तहत निजामाबाद के ब्लैक पॉटरी उद्योग का चयन किया गया है। ओडीओपी के तहत प्रदेश सरकार हस्तशिल्प कलाकारों को बिना गारंटी के बैंक से 25 प्रतिशत सब्सिडी पर लोन देने की सुविधा दी है। बैंक से लोन लेकर करीब 1200 उद्यमी शिल्पकार अपना कारोबार शुरू कर चुके हैं। ये शिल्पकार अपने उत्पाद का मेला लगवा रहे हैं। ओडीओपी के तहत शासन स्तर से मेले का आयोजन कर माल की बिक्री कराई जा रही है। इस योजना के तहत उद्यमियों को लाभ देना सरकार की मुख्य योजना में है।
निजामाबाद के उद्यमी शिल्पकार बैजनाथ प्रजापति, संजय यादव, सोहित कुमार प्रजापति, शिवरतन प्रजापति, शिवजतन प्रजापति, बाबूलाल प्रजापति चाहते हैं कि हम लोगों की ब्लैक पॉटरी के लिए मिट्टी की व्यवस्था की जाए। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को मिट्टी मिले और हम लोग अपना व्यवसाय सही तरीके से कर सकें। शासन ने ओडीओपी के तहत निजामाबाद में सामान्य सुविधा केंद्र का निर्माण कराया है।
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कलाकारों के सामने मिट्टी का संकट
सरकार ने ओडीओपी के तहत निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी का चयन किया है लेकिन मिट्टी की समस्या अभी दूर नहीं हो सकी है। इस धंधे से जुड़े हस्तशिल्प कलाकारों को मिट्टी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कलाकार जिन पोखरियों से मिट्टी निकालते थे, उन्हें प्रशासन ने दूसरों के नाम पर पट्टा कर दिया है। इसके कारण उनके समक्ष मिट्टी की समस्या पैदा हो रही है। शिल्पकार चाहते हैं उनके लिए मिट्टी खनन के लिए पोखरी का आवंटन किया जा सके।
बहुत से लोग ब्लैक पॉटरी के कार्य को छोड़ चुके हैं लेकिन ओडीओपी के तहत हमने इन लोगों को इलेक्ट्रिक चाक दिलाई। लोग अब इलेक्ट्रिक चाक से ब्लैक पाटरी के साथ लाल बर्तन तैयार कर रहे हैं। उनको खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और सरकार से संचालित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया गया। इसका परिणाम है कि अब तक लगभग 1300 लोग इस कार्य से जुड़ चुके हैं। कलाकारों को मिट्टी खनन के लिए पोखरियों का पट्टा देने के लिए एसडीएम से बात हुई है। उन्होंने पट्टा देने का आश्वासन दिया है।-प्रवीण मौर्य, उपायुक्त स्वरोजगार।
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