आजमगढ़। जिले में शिकायत पर शुरू हुई सांसद और विधायक निधि मामले की जांच में अभी तक अपने मुकाम पर नहीं पहुंच सकी है। जिलाधिकारी की ओर से दोषी प्रबंधकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन मामले में गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई। इन स्कूल-कालेजों की मान्यता प्रत्याहरण का आदेश भी जिलाधिकारी की ओर से जारी होने के बाद भी अब तक किसी विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण नहीं की गई है।
बताते चलें कि पीआईएल दाखिल होने के बाद पर हाईकोर्ट की ओर से 12 नवंबर 2013 को जिले के 82 विद्यालयों की जांच का आदेश दिए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन विद्यालयों के जमीन न होने के बाद भी सांसद और विधायक निधि जारी की गई।
न ही इनके पास विद्यालय भवन ही है। अदालत की अवमानना के बाद मामले की जांच शुरू की गई। कई विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी हुए, लेकिन इसका पालन नहीं हो सका। मार्च 2017 तक प्रशासन की ओर से मात्र 24 विद्यालयों पर लगे आरोपों का ही निस्तारण किया गया है।
इनमें से जांच में पकड़े जाने के बाद छह विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण का आदेश तत्कालीन जिलाधिकारी सुहास एलवाई की ओर से 30 मार्च 2017 को जारी किया गया था, लेकिन अभी तक किसी विद्यालय के मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई नहीं की गई है।
इतना ही नहीं सात विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ संबंधित थानों में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था, लेकिन अभी तक पुलिस की ओर से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि कई लोगों से निधि के धन की वसूली हो चुकी है।
वहीं 17 विद्यालय ऐसे हैं जिनके खिलाफ शिकायत निराधार पाई गई। जबकि तत्कालीन सीआरओ ने अपनी जांच में पाया था कि उक्त विद्यालयों के खिलाफ जमीन नहीं है। ऐसे में प्रशासन द्वारा किए गए सांसद और विधायक निधि के निस्तारण में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
केस- 1
तेरही स्थित मां बच्ची सत्ती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हसनपुर तेरही प्रबंधक द्वारा उपलब्ध कराई खतौनी में नहीं मिला। जांच के दौरान प्रबंधक द्वारा निधि लेने के लिए लगाई गई खतौनी भी फर्जी पाई गई। इस पर विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ कप्तानगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इनके द्वारा ली गई पांच लाख रुपये के निधि की वसूली भी की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी ने विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण का आदेश भी जारी किया लेकिन अब तक मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई नहीं हो सकी।
केस- दो
रोहुआ मुस्तफाबाद स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय प्राथमिक विद्यालय के प्रबंधक द्वारा फर्जी खतौनी लगाकर 12.75 लाख रुपये की सांसद और विधायक निधि प्राप्त की गई। जांच के दौरान एसडीएम लालगंज ने पाया कि न तो विद्यालय के नाम से भूमि है और ना ही उक्त विद्यालय मौके पर उपस्थित है। इस पर विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के विरुद्घ गंभीरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके साथ ही आरसी जारी कर लगभग 13 लाख की वसूली की गई।
केस- तीन
निजामाबाद स्थित मनां बुद्घा नेशनल महाविद्यालय गंधुवई के प्रबंधक द्वारा 86 लाख रुपये की सांसद और विधायक निधि ली गई थी। जांच के दौरान छह लाख रुपये का दुरुपयोग पाया गया। इनको नोटिस जारी कर छह लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया जो जमा हो चुका है। इस मामले में विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के विरुद्घ निजामाबाद थाने में मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन अब तक पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। तत्कालीन जिलाधिकारी ने उक्त मामले में विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण का भी आदेश दिया लेकिन उनके आदेश के आठ महीने बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।
केस- चार
निजामाबाद स्थित नन्हकू दास स्मारक हायर सेकेंड्री स्कूल के प्रबंधक द्वारा 25 लाख रुपये की सांसद और विधायक निधि ली गई थी। जांच में 12 लाख रुपये का दुरूपयोग करने का मामला प्रकाश में आया। जिस पर प्रबंधक को 12 लाख रुपये जमा करने की नोटिस जारी हुई जो जमा हो चुकी है। इस मामले में निजामाबाद थाने में प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन जिलाधिकारी ने मान्यता प्रत्याहरण का आदेश भी दिया था लेकिन अब तक विद्यालय का संचालन हो रहा है।
केस- पांच
हमीदपुर स्थित आरबीएस मेमोरियल पूर्व माध्यमिक विद्यालय हमीदपुर के प्रबंधक द्वारा 34.50 लाख रुपये की सांसद और विधायक निधि ली गई थी। निधि लेने के लिए प्रबंधक द्वारा लगाई गई खतौनी की जांच में वह फर्जी पाई गई। इस पर उनसे सारे पैसों की वसूली कर ली गई है। लेकिन प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ रानी की सराय थाने में दर्ज मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी का मान्यता प्रत्याहरण का आदेश भी हवा-हवाई साबित हुआ है।
केस- छह
हमीदपुर स्थित ठाकुर राजबहादुर सिंह स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हमीदपुर के प्रबंधक द्वारा कुल 60.60 लाख रुपये सांसद और विधायक निधि ली गई। शिकायत के बाद हुई जांच में प्रबंधक द्वारा निधि लेने के लिए लगाई गई खतौनी फर्जी पाई गई। इस पर प्रबंधक को नोटिस जारी कर ली गई निधि की वसूली की गई। लेकिन इस मामले में प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ रानी की सराय थाने में दर्ज मामले और जिलाधिकारी द्वारा मान्यता प्रत्याहरण के दिए गए आदेश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
केस- सात
हमीदपुर स्थित राजबहादुर सिंह स्मारक महाविद्यालय हमीदपुर के प्रबंधक द्वारा 55 लाख रुपये की सांसद और विधायक निधि ली गई। जांच में समिति द्वारा 45.18 लाख रुपये का दुरूपयोग किया जाना पाया गया। इस पर प्रबंधक को नोटिस जारी कर वसूली की गई। लेकिन इस मामले में प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ रानी की सराय थाने में दर्ज मामले और जिलाधिकारी द्वारा मान्यता प्रत्याहरण के दिए गए आदेश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर जिलाधिकारी का आदेश है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मान्यता प्रत्याहरण का कार्य हमारे हाथ में नहीं है। इसके लिए हम सचिव को रिपोर्ट भेजेंगे उनके स्तर से मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
डा. वीके शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।