आम लोगों को सस्ती और अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के प्रति संकल्पित मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने लचर हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगाम कसा है। शासन ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डाक्टरों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस पर अमल करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डाक्टरों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए गुरुवार को चार सदस्यीय टीम का गठन किया। इस टीम की रिपोर्ट का मुख्य चिकित्साधिकारी संबंधित डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी आम आदमी ने शिकायत नहीं की है लेकिन सामाजिक संगठनों ने ऐसे डाक्टरों की लिस्ट सीएमओ को सौंपी है, जो प्राइवेट में मोटी फीस वसूलकर इलाज करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले के सीएचसी और पीएचसी पर कुल 109 महिला, पुरुष डाक्टर तैनात हैं। इनके अलावा, जिला अस्पताल में लगभग 33 और जिला महिला अस्पताल में सात डाक्टरों की तैनाती है। विभागीय सूत्रों की मानें तो ज्यादातर डाक्टर अस्पताल में कम समय देते हैं। अपने निजी आवास या किसी निश्चित स्थान पर प्रैक्टिस कर अच्छी खासी कमाई करते हैं।
इनके अलावा, कई डाक्टर ऐसे भी हैं जिनकी तैनाती किसी अन्य जिले में है लेकिन वह जिले में अपना प्राइवेट नर्सिंग होम खोलकर चला रहे हैं। ऐसे डाक्टरों का प्राइवेट अस्पताल शहर के अलावा लालगंज, देवगांव, बिंद्राबाजार, फूलपुर, मेंहनगर, मुबारकपुर, जीयनपुर, बूढनपुर, अहरौला, पवई आदि क्षेत्रों में स्थित है। अपने अस्पताल को चमकाने में डॉक्टर लगे हुए हैं। डाक्टरों को सुबह, शाम उनके निजी अस्पताल पर देखा जा सकता है। बुधवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने सरकारी डाक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस न करने की चेतावनी दी है।
सीएमओ एसके त्रिपाठी ने बताया कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डाक्टरों की धरपकड़ के लिए चार सदस्यीय डाक्टरों की टीम का गठन किया गया है, जो निश्चित ठिकानों पर छापेमारी कर ऐसे डाक्टरों की सूची बनाकर रिपोर्ट सौंपेंगे। उसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।