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Azamgarh News: राजा परीक्षित प्रसंग से श्रद्धालुओं में जगी भक्ति भावना

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श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते कथा व्यास आचार्य महादेव पाठक। संवाद
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ठेकमा। श्री राम जानकी मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं रुद्राभिषेक कार्यक्रम में रविवार को श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक रस में डूबे नजर आए। कथा स्थल पर क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। भगवान के जयकारों और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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कथा व्यास आचार्य महादेव पाठक ने राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित धर्मनिष्ठ और प्रजावत्सल शासक थे। एक प्रसंग में ऋषि का अपमान हो जाने पर उन्हें सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला। राजा परीक्षित ने श्राप को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार किया और सांसारिक मोह-माया का त्याग कर अंतिम समय भगवान की भक्ति और कथा श्रवण में समर्पित कर दिया।
आचार्य ने बताया कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी महाराज से जीवन, मृत्यु और मोक्ष से जुड़े गूढ़ प्रश्न पूछे। इसके उत्तर में शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का अमृत पान कराया। कथा श्रवण के माध्यम से परीक्षित ने भक्ति को दृढ़ किया और मोक्ष का मार्ग प्राप्त किया। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराते हुए सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का आनंद लिया और भगवान के जयकारे लगाए। मंदिर परिसर में चल रहे रुद्राभिषेक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया। कथा समापन पर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
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