आजमगढ़। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने आजमगढ़ मंडल के 323 माध्यमिक विद्यालयों को डिबार घोषित किया है। इसमें सबसे अधिक बलिया के 255 विद्यालय हैं। आजमगढ़ के 37 और मऊ के 35 विद्यालय सूची में हैं। आगामी वर्ष 2013 की बोर्ड परीक्षा के लिए डिबार घोषित किए गए विद्यालयों में शामिल राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालय कुछ शर्तों के साथ दोबारा परीक्षा केंद्र बन सकते हैं। जबकि वित्त विहीन विद्यालय किसी भी कीमत पर परीक्षा केंद्र नहीं बन सकते हैं।
यूपी बोर्ड को संचालित करने वाला माध्यमिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद के वाराणसी केंद्र से प्रदेश के 23 जिले संबद्ध हैं। वाराणसी केंद्र से संबद्ध 23 जिलों में अंबेडकर नगर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, फैजाबाद, गोरखपुर, मऊ, सुल्तानपुर, बलरामपुर, महराजगंज, संतकबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, वाराणसी, मिर्जापुर व सोनभद्र शामिल है। वर्ष 2010-2011 और वर्ष 2012 में संपन्न हुई बोर्ड परीक्षा के दौरान आजमगढ़ मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया जिले में नकल माफिया ने नकल विहीन परीक्षा की धज्जियां उड़ा कर रख दी थी। परीक्षा के दौरान कई परीक्षा केंद्रों को इमला बोलते पकड़ा भी गया था। जहां की परीक्षा निरस्त कर वहां दुबारा परीक्षा करानी पड़ी थी। इतना ही नहीं वर्ष 2011 की परीक्षा से पूर्व मानक से अधिक छात्र-छात्राओं का ओएमआर आवेदन पत्र अग्रसारित कर दिया गया था। पिछले तीन साल के रिकार्ड के आधार पर माध्यमिक शिक्षा परिषद वाराणसी केंद्र ने सभी 23 जिलों के करीब 390 विद्यालयों को डिबार घोषित किया। लेकिन सबसे अधिक आजमगढ़ मंडल के विद्यालय इस श्रेणी में शामिल किए गए है। मंडल में इस तरह के विद्यालयों की संख्या 323 है। जिन्हे काली सूची में डाल परीक्षा केंद्र बनने से वंचित किया गया। इसमें आजमगढ़ के 33 विद्यालय, मऊ के 35 तथा बलिया के 255 विद्यालय शामिल है। जिला विद्यालय निरीक्षक रामचेत ने बताया कि राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालय को दोबारा परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है। लेकिन केंद्र व्यवस्थापक दूसरे विद्यालय के होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मा. शिक्षा परिषद वाराणसी के सचिव ने डिबार किए गए विद्यालयों की सूची संबंधित जिलों को भेज इसकी सूचना भी दे दिया है।