अपराधियों के मुखबिर के तौर पर काम कर रहे हैं कई पुलिसकर्मी
अाशीष तिवारी/भारतेंदु मिश्र
आजमगढ़। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पुलिस की गिरती साख को बचाने के प्रयास में जुटे हैं मगर जिले के अधिकारियों को इसकी परवाह नहीं है। शायद यही वजह है कि एक दर्जन से अधिक सिपाहियों के अपराधियों से संबंध होने के मामले की रिपोर्ट कई बार भेजी गईं लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन सिपाहियों पर आरोप है कि ये अपराधियों की मुखबिरी करते हैं। इनमें कई के संबंध पशु तस्करों से भी होने पाए गए हैं।
पुलिस विभाग की रिपोर्ट बताती है कि कई पुलिसवाले अपनी ड्यूटी करने के बजाए अपराधियों की मुखबिरी करते हैं। तरवां थाना क्षेत्र के नरायनपुर गांव में 11 मई, 2013 की रात बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर ट्रांसपोर्टर धनराज यादव की हत्या कर दी थी। मामले में पूर्व ब्लाक प्रमुख तरवां अखंड प्रताप सिंह सहित नौ लोगों को आरोपित किया गया। पुलिस ने अखंड की गिरफ्तारी के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया मगर वह गिरफ्त में नहीं आया। अभी भी वह फरार ही है।
तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के निर्देश पर सीओ लालगंज आतिश कुमार सिंह ने इस नाकामी का कारण जानने का प्रयास किया तो पता चला कि तरवां थाने के पांच और मेहनगर थाने के तीन सिपाहियों से अखंड की लगातार मोबाइल पर बात होती है। इसकी रिपोर्ट सीओ ने कार्रवाई के लिए भेज दी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इससे पूर्व भी सीओ लालगंज की तरफ से दो उपनिरीक्षकों और तीन सिपाहियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी।
इनके अलावा अतरौलिया, पवई, महराजगंज, सरायमीर,शहर कोतवाली में तैनात कई सिपाहियों की शह पर उनके क्षेत्र में पशु तस्करी होने के प्रमाण मिले थे। ये सिपाही रुपयों की लालच में तस्करों की गाड़ी उस रास्ते से निकाल देते थे, जिस मार्ग की चेकिंग नहीं होनी होती थी। इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए भेजी गई रिपोर्टें भी दबी पड़ी है। कार्रवाई न होने से ऐसे पुलिस कर्मियों का मन बढ़ता जा रहा है।