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तमसा मंजूषा संगम पर माघी पूर्णिमा के स्नान के लिए उमड़ श्रद्घालू

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मेजवां/कटानी बाजार। माघी पूर्णिमा पर मंगलवार को जनपद के पौराणिक स्थलों पर नदियों और सरोवरों में स्नान करने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान लोगों ने पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान पर मंदिरों में पूजा-अर्चना कर परिवार के सुख समृद्घि की कामना की।
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फूलपुर तहसील के पौराणिक स्थल दुर्वासा धाम पर भोर से ही श्रद्घालुुओं का तांता लगा हुआ था। तमसा मंजूषा के संगम पर स्नान करने के लिए श्रद्घालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने नदियों और पवित्र सरोवरों में स्नान कर धाम पर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सरोवर के किनारे और मंदिरों के सामने पूजा सामग्रियों की दुकानें भी सज गई थी। घंटा घड़ियाल की आवाज और लोगों के जयकारे से पूरा धाम गूंज रहा था। हिंदू धर्म में माघी पूर्णिमा का दिन खास माना जाता है। मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया गंगा स्नान मोक्ष दिलाने वाला होता है। इस तिथि को सूर्य और चंद्रमा का संगम भी कहा जाता है, क्योंकि माघ का महीना सूर्य देव का माह होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। सूर्य और चंद्रमा का यह संगम माघ पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। फूलपुर स्थित कुंवर नदी और सरोवरों में भी लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई।वहीं महराजगंज स्थित भैरोबाबा स्थान पर भी दर्शन पूजन के लिए भोर से ही श्रद्घालुओं का तांता लगा हुआ था। लोगों ने पवित्र सरोवर में डुबकी लगाने के साथ ही बाबा के दरबार में मत्था टेका। श्रद्घालुओं ने बाबा को नारियल, चुनरी, धूप, अगरबत्ती, माला फूल, काली मिर्च की बोरी चढ़ाया। महिलाओं ने भैरव बाबा को हलवा पूड़ी चढ़ाया तो नव विवाहिता जोड़ों ने बाबा के दरबार में मत्था टेक आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद लोगों ने मंदिर परिसर में लगे मेले में जमकर खरीदारी की। लोगों द्वारा लगाए जा रहे जयकारे से पूरा क्षेत्र दिन भर गूूंजता रहा।
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