आजमगढ़। जिस जमीन पर मकान बनाने के लिए एडीए लोगों को सालों से नोटिस जारी कर परेशान करता रहा, जब बात सरकारी बिल्डिंग की आई तो जांच में वह भूमि विनियमित क्षेत्र की निकली। अब इस जमीन में भवन और दुकान बनाने वाले लोग मानचित्र स्वीकृत कराने की तैयारी में जुट गए हैं। ताकि एडीए की ओर से दी जा रही परेशानी से वह हमेशा के लिए बच सकें। नगर के मड़या मुहल्ले में शारदा तिराहे पर बने आधा दर्जन भवन मालिकों को एडीए की ओर से कई सालों से ग्रीन लैंड में होने का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर परेशान किया जाता रहा। नोटिस का हवाला देकर विभाग के कर्मचारी धनउगाही भी करते थे। इसी बीच बाढ़ खंड की ओर से अपनी उक्त भवनों से सटे ही अपनी जमीन में कार्यालय का निर्माण कराया जाने लगा। तब एडीए की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर निर्माण को रोकवा दिया गया। मामला जिलाधिकारी दरबार में पहुंच गया। जिलाधिकारी ने उक्त जमीन की जांच कराने तक निर्माण रोकने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर टाउन प्लानर ने उक्त भूमि की जांच की। जिसमें पाया कि वह ग्रीनलैंड एरिया में नहीं है। इस क्षेत्र में भवन बनाए लोग पहले से ही एडीए से यह बात कहते आ रहे हैं कि वह ग्रीनलैंड में नहीं है, लेकिन विभाग ने उनकी एक नहीं सुनी। लेकिन जब बात सरकारी बिल्डिंग की आई तो यह जांच एक हफ्ते में ही पूरी कर ली गई। जैसे ही यह जानकारी उस क्षेत्र में भवन बनाने वाले लोगों को हुई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। अब वह लोग भी अपना मानचित्र स्वीकृत कराने की तैयारी में जुट गए है।
टाउन प्लानर की रिपोर्ट मिल चुकी है जिसमें यह निर्धारित हो चुका है यह भूमि ग्रीन लैंड की नहीं है। अब बाढ़ खंड बिल्डिंग के निर्माण में खाना पूर्ति बाकी है। इसके लिए बाढ़ खंड को हमसे मानचित्र को स्वीकृत कराना होगा। साथ ही इस क्षेत्र में अन्य भवनों के मालिक भी अपना मानचित्र स्वीकृत करा सकते हैं।
बाबू सिंह, एडीए सचिव।