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अरबों के घाटे में चल रही सठियांव चीनी मिल

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आजमगढ़। जिले के हजारों किसानों और सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी रोटी का साधन चीनी मिल अब घाटे का सौदा बन गया है। प्रबंधन की मनमानी और अव्यवस्था के चलते साल दर साल चीनी मिल का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि चीनी मिल अधिकारी इस आंकड़े को छुपाने में लगे हैं और सूचना मांगने पर गलत आंकड़े देते हैं। इस संदर्भ में अमर उजाला ने जब पड़ताल शुरू की तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। पड़ताल की शुरूआत में जब चीनी मिल के जीएम से बात की गई तो उन्होंने घाटा लमसम 28 करोड़ के आसपास बताया जबकि कंपनी सूत्रों से जो बैलेंसशीट प्राप्त हुई वह दर्शाती है कि मिल का घाटा अरबोें में है। ऐसे में साल दर साल चीनी मिल को पड़ रही इस घाटे की चोट से किसान और यहां काम कर रहे कर्मचारी चिंतित हैं। दरअसल, सपा सरकार में किसानों और क्षेत्रीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए दि किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड सठियांव का आधुनिकीकरण किया गया। मिल प्रबंधन की बदतर कार्यशैली के चलते चीनी मिल के घाटे का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता गया। विगत वर्ष घाटा करोड़ों में था लेकिन इस वर्ष यह घाटा अरबों में पहुंच गया है। वहीं, चीनी मिल के जीएम बीके अबरोल मात्र इस घाटे को मात्र 28 करोड़ के आस पास बताते हैं जबकि हकीकत कुछ और ही है। वहीं, चीनी मिल के पूर्व उप चेयरमैन आनंद कुमार उपाध्याय ने भी माना कि जिस उद्देश्य को लेकर चीनी मिल का आधुनिकीकरण किया गया, वह उद्देश्य आज पूरा नहीं हो पा रहा है। मिल प्रबंधन की कार्यशैली के कारण यह सब कुछ हो रहा है। मिल की बैलेंस शीट देखने से पता चलता है कि 2017 के अपने पहले पेराई सत्र में मिल 77 करोड़ 54 लाख 68 हजार 438 रुपये 38 पैसे घाटे में थी। इस वर्ष में यह घाटा कम होने की बजाए और बढ़कर अरबों में पहुंच गया। इस वर्ष मिल को एक अरब आठ करोड़ 76 लाख 64 हजार 61 रुपये 32 पैसे का घाटा हुआ है। जबकि चीनी मिल के जीएम बीके अबरोल सिर्फ 28 करोड़ का घाटा होने का दावा करते हैं। चीनी मिल जीएम का दावा है कि इस बार की बैलेंस सीट मेें पिछली चीनी मिल के समय का भी लगभग 43 करोड़ रुपये बकाया जोड़ा गया है। हालांकि मिल के बैलेंसशीट का अवलोकन करने पर इसमें पिछले किसी भी डेबिट का कोई विवरण दिखाई नहीं देता।
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बैलेंस शीट में मिल द्वारा दो वर्षों में की आमदनी
2017 2018
कुल आमदनी: 95.88 करोड़ 108.47 करोड़
कुल खर्च: 173. 43 करोड़ 217.23 करोड़
घाटा 77.55 करोड़ 108.76 करोड़

वर्तमान में सठियांव चीनी मिल घाटे में चल रही है। जो बैलेंस शीट उपलब्ध कराई गई है, वह हमारे ही सीए द्वारा बनाई गई है। लेकिन इसमें पिछली मिल के बकाया लगभग 43 करोड़ रुपये को भी जोड़ा गया है जिसके कारण घाटा अरबों में दिखा रहा है।
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- बीके अबरोल, जीएम, दि किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड सठियांव।
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