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तीन गांव के कटान पीड़ित 74 किसानों को मिलेगा मुआवजा

Sat, 16 Dec 2017 12:06 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
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पैसे - फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़। सगड़ी तहसील के देवरांचल में कटान पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन उन्हें मुआवजा उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इसके लिए तीन गांवों के 74 किसानों को कटान पीड़ित चिन्हित किया है।
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 सगड़ी तहसील के देवारावासियों को प्रति वर्ष घाघरा के बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है।  इस वर्ष आई बाढ़ में बहुत से लोग से लोगों की कृषि योग्य भूमि घाघरा के कटान की भेंट चढ़ गई। प्रशासन के सर्वे में तीन गांवों देवारा खास राजा, सेमरी और लोहरैया के 74 किसान कटान पीड़ित पाए गए।

इन किसानों की 16.752 हेक्टेअर भूमि बाढ़ के दौरान घाघरा काटकर अपनी धारा में विलीन कर चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत भूमि देवारा खास राजा की कटी है। कि सानों को मुआवजा देने के लिए किसानों से बैंक खाते मांगे जा रहे हैं। लेकिन अब तक 50 किसानों ने ही जिला प्रशासन को अपने अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए हैं।
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मुआवजे में 37500 रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से किसानों में भुगतान किया जाना है।

जिले में सगड़ी तहसील के तीन गांवों के 74 लोगों को कटान पीड़ित चिन्हित किया गया है। मुआवजा देने के लिए इनसे बैंक का खाता मांगा गया है। क्योंकि आनलाइन ही पैसा इनके खाते में भेजा जाना है। लेकिन अब तक 50 लोगों के ही बैंक खाते की डिटेल उपलब्ध हो सकी है। जैसे ही अन्य लोगों के बैंक खाते की डिटेल आ जाती है मुआवजे की धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेज दी जाएगी।
वीके गुप्ता, एडीएम वित्त एवं राजस्व।

किसानों का खाता लेना पड़ रहा भारी
जनपद के देवारा क्षेत्र में गोरखपुर के बहुत से किसानों की भूमि है। नदी की तलहटी में होने के कारण शायद इनमें से ज्यादातर लोगों को उस जमीन के बारे में जानकारी ही नहीं है। या फिर जिसके नाम पर जमीन है उसका देहांत हो चुका है।

यह लोग रहने वाले तो गोरखपुर जनपद के हैं लेकिन उनकी जमीन आजमगढ़ क्षेत्र में स्थित है। मुआवजे का पैसा उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से गोरखपुर लेखपाल को भेजकर कटान पीड़ितों का पता लगाया जा रहा है।

पिछले वर्ष के भी बचे हैं मुआवजे के पैसे
नदी के किनारे रेती में बहुत से किसानों की जमीन है। जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों के बारे में किसानों को जानकारी भी नहीं है। लेकिन कटान होने के बाद उनके नाम पर मुआवजा राशि पिछले वर्ष भी आई थी। लेकिन इन किसानों के न मिलने के कारण इसमें से लगभग छह से सात लाख रुपये अभी तक जिला प्रशासन के पास पड़े हुए हैं। सही व्यक्ति न मिलने के कारण मुआवजे का भुगतान नहीं हो सका है।
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