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आफिस में पत्रावली का पता नहीं, हर माह करोड़ों का भुगतान

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आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग से लगभग 80 दलित विद्यालय संचालित होते हैं। इसमें विभिन्न पदों पर लगभग आठ सौ अध्यापक हैं। इन्हें हर माह करोड़ों का भुगतान वेतन के रूप में होता है। इसके बाद कई लोगों को पेंशन भी दी जाती है। जबकि इन विद्यालयों और इनमें कार्यरत अध्यापकों से संबंधित सभी अभिलेख विभाग में नहीं हैं। कई बार विद्यालयों को अभिलेख देने के निर्देश दिए गए, लेकिन आज तक नहीं मिले। अब एक बार फिर सभी विद्यालयों को प्रारूप जारी कर संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित पत्रावली तलब की गई है।
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मजे की बात ये है कि कार्यालय में अभिलेख न होने की दशा में विभाग अब तक प्रति माह करोड़ों रुपये का वेतन और पेंशन के रूप में भुगतान कैसे कर रहा था। जबकि सौ से ज्यादा शिक्षक ऐसे हैं जिनके बारे में लगातार फर्जी होने के आरोप लगते रहते हैं। समाज कल्याण विभाग में तैनात शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर हमेशा सवाल खड़े होते रहते हैं। पूर्व डीएम सीबी सिंह के निर्देश पर सभी शिक्षकों के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह ने विद्यालय और शिक्षकों से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के लिए सभी विद्यालयों को नोटिस भी जारी की थी। इसके बाद भी विद्यालयों की ओर से अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। वर्तमान समाज कल्याण अधिकारी साहित्य निकस सिंह ने विद्यालयों को जारी पत्र में लिखा है कि विभाग से संचालित विद्यालय और शिक्षकों को पूर्ण अभिलेख कार्यालय में नहीं हैं। इससे सभी का वेतन जारी करने और जनसूचना अधिकार के तहत किए गए सवालों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

150 करोड़ के घोटाले को लेकर चर्चित रहा है विभाग
आजमगढ़। समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग पहले भी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन आदि में 150 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर चर्चित रहा है। इसमें 36 लोगों पर एफआईआर के साथ ही पांच लोगों को गिरप्तार भी किया जा चुका है। चार लोगों पर गैंगेस्टर की भी कार्रवाई हो चुकी है। मामले की जांच ईओडब्ल्यू के पास जाने से फिलहाल कार्रवाई ठंडी पड़ी है। घोटाले में सम्मिलत कई आरोपी और कर्मचारी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं और विभाग में कार्यरत भी हैं।
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वेतन भुगतान और अन्य समस्याओं को देखते हुए सभी विद्यालयों से अभिलेख तलब किए गए हैं। विभाग के कार्यालय में संबंधित अभिलेख न होना आश्यचर्यजनक है। अभिलेख मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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साहित्य निकष सिंह, प्रबारी समाज कल्याण अधिकारी
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