आजमगढ़। जिले के अधिकांश सरकारी नलकूपों का लाभ सभी किसानों को नहीं मिल रहा है। कारण कि अधिकांश नलकूपों की नालियां जर्जर हो गई है। नाली क्षतिग्रस्त होने के चलते दूर वाले खेतों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि विभाग हर वर्ष नाली मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये डकार जाता है। बावजूद पानी किसान के खेत तक नहीं पहुंच पाता है। पीक आवर में नलकूपों का बेहतर तरीके से उपयोग न होने से धान की नर्सरी व फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसी तरह किसान निजी संसाधनों से फसलों को बचाने में जुटे हुए हैं।
किसानों को खेत की सिंचाई करने में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए जिले में 571 राजकीय नलकूप लगाए गए हैं। नलकूप व नालियों की मरम्मत के लिए विभाग को हर वर्ष शासन से अच्छी खासी रकम मिलती है। बावजूद मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं होता है। क्षेत्र में अधिकतम नालियां जर्जर हो गई है जिससे किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसान को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जबकि जिम्मेदार कागजों में सब कुछ दुरुस्त मानकर चुप हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो हर वर्ष प्रति नलकूप की नालियों के मरम्मत के लिए शासन से 12 हजार 500 रुपये मिलते हैं। इस हिसाब से 571 नलकूप की नालियों के मरम्मत के लिए प्रति वर्ष करीब 71 लाख 37 हजार 500 रुपये मिलता है। बावजूद विभाग नालियों की मरम्मत नहीं करा रहा है। ऐसे में किसान धान की सिंचाई करने के लिए परेशान हैं। लगभग-लगभग हर ब्लाकों की यही स्थिति है। कहीं नाली को पाटकर सड़क बना दिया गया तो कहीं नालियों में झाड़-झंखार उग गए हैं। वहीं कई नालियां तो क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिसे बनवाने के लिए विभाग कभी जहमत ही नहीं उठाता है। इससे किसानों को थक हार कर निजी नलकूपों से सिंचाई करानी पड़ रही है।
पिछले वर्ष साफ-सफाई व मरम्मत कराने का दावा
आजमगढ़। पल्हनी ब्लाक के गेलवारा गांव में सरकारी नलकूप है। इस नलकूप पर एक शिलापट लगाया गया है कि ‘मुख्यमंत्री घोषणा योजनांतर्गत नलकूप के नाली की आधुनिकीकरण वर्ष 2016-17 नलकूप संख्या 2एजी’ पर कार्य कराए गए हैं। जबकि ऐसा कुछ वहां दिखाई नहीं पड़ा। नालियां पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। नालियों पर झाड़-झंखाड़ है। जिससे किसानों को पानी की समस्या उतपन्न हो रही है।
पट गई नलकूप की नाली, सिंचाई में परेशानी
आजमगढ़। सठियांव ब्लाक के लोहरा गांव में बनी राजकीय नलकूप की नाली पट चुकी है। कहीं पूरी तरह से पटी पड़ी है तो कहीं क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं कई जगह तो झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी है। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेत की सिंचाई नहीं कर पाते हैं। निजी ट्यूबवेल के माध्यम से उन्हें सिंचाई करना पड़ता है। इस मामले में नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता ई. अनिल कुमार ने बताया कि हर वर्ष क्षतिग्रस्त नालियों व नलकूप मरम्मत के लिए प्रति नलकूप 12 हजार 500 रुपये शासन से मिलते हैं, जिससे नालियों की मरम्मत के साथ-साथ यांत्रिक खराबी को भी दूर किया जाता है। यदि कोई किसान नाली की समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान किया जाता है।