आजमगढ़। किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा देने की बात कही जाती है। सिंचाई की बात करें तो जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। जिले की 1811 गांवों के 8.27 लाख किसानों के लिए 622 नलकूप लगाए गए हैं, इनमें से 13 खराब पड़े हैं। बड़ी बात यह है कि इन नलकूपों को चलाने और बंद करने के लिए सिर्फ 89 ट्यूबवेल ऑपरेटर ही हैं। इनमें से बलिराम में 6 और कैथोलिया में 7 साल से नलकूप खराब है।
ऐसे में नलकूपों का संचालन नियमित कैसे हो सकेगा, इस सवाल पर जिम्मेदारों का जवाब भी हैरत में डालने वाला है। जिम्मेदारों का कहना है कि सीमित संसाधनों से बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। सोमवार जब इसकी पड़ताल की गई तो कोई एक, दो महीने तो कोई एक साल से अधिक समय से खराब पड़े हुए हैं। एक नलकूप से औसतन 500 हेक्टेयर की सिंचाई होती है। आगे धान की नर्सरी डालने और रोपाई का समय आ गया है। ऐसे में खराब नलकूपों और ट्यूबवेल ऑपरेटरों की कमी से धान की फसल करना किसानों के लिए मुश्किल होगा। ऑपरेटरों की कमी और खराब नलकूप के कारण किसानों को निजी संसाधनों से खेती करनी पड़ रही है। मेहनाजपुर क्षेत्र स्थित भरपूर पिछवार गांव में पूर्व सांसद डॉ. बलिराम के गांव में लगा नलकूप 16 सालों से खराब पड़ा है। बीच में एक, दो बार बना भी लेकिन दो, तीन दिन के बाद फिर खराब हो गया। अतरौलिया क्षेत्र के तेजापुर गांव में लगा नलकूप भी हमेशा खराब ही रहता है। किसानों ने इसकी शिकायत विभाग से की है लेकिन अभी तक बना नहीं। बूढ़नपुर के कैथौलिया में लगा नलकूप सात साल से खराब पड़ा है।
पवई: क्षेत्र के भरचकिया गांव का राजकीय नलकूप पांच माह से खराब पड़ा है। इससे किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। किसान उमेंद्र सिंह, अवधेश यादव ने बताया कि शिकायत के बाद भी नलकूप को बनाया नहीं जा रहा है।
बरदह: क्षेत्र के राजेपुर, पसिका, उदियावां, ठेकमा, सराय पल्टू का राजकीय नलकूप खराब पड़ा है। किसान विष्णुदत्त तिवारी, रत्नेश राय न बताया कि ट्यूबवेल को बनाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, जिसके कारण एक, दो दिन चलने के बाद बंद हो जाते हैं।
10 वर्षों बाद भी नहीं बना नलकूप
मेंहनगर। क्षेत्र के तीन गांवों में सिंचाई क लिए लगा नलकूप वर्षों से खराब पड़ा है। इसको अभभीा तक बनाया नहीं जा सका है। क्षेत्र के किसान विनोद सिंह, जनार्दन यादव, शैलेष ने बताया कि गोपालपुर गांव का नलकूप लगभग 10 सालों से खराब है। विभागीय उदासीनता के कारण इसकी बोरिंग भी बैठ गई है। वहीं, घिनहापुर का तीन तो कम्हरियां का नलकूप दो सालों से खराब पड़ा है। संवाद
एक माह से जला है नलकूप का मोटर
अहरौला। क्षेत्र के जजऊपुर कल्यानपुर सरकारी नलकूप का मोटर एक माह से जला पड़ा है। इससे सब्जी, गन्ना, मक्का, बाजरा की फसल सूख रही है। जिला पंचायत सदस्य हरिकेश यादव ने बताया 15 से 20 दिन पर मोटर खराब हो जाता है। विभाग नया मोटर नहीं लगवा रहा है। कतिकौली सहुवल गांव में स्थापित नए नलकूप का पंप खराब छह माह से खराब होने से पानी नही दे रहा है। 1200 मीटर बिछाई गई पाइपलाइन भी जगह-जगह लीकेज हो रही है। संवाद
किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नलकूप तो लगाए गए थे, लेकिन ऑपरेटरों की कमी के नलकूपों का समय से संचालन नहीं हो पाता। जब पानी की जरूरत रहती है तो ऑपरेटर रहते ही नहीं हैं। इसके कारण सही नलकूप भी बंद ही रहते हैं। - बब्बू राय, बरदह
खराब नलकूपों की मरम्मत के लिए विभाग में शिकायत की जाती है, लेकिन जो नलकूप खराब हो जा रहे, उसको विभाग समय से बना नहीं रहा है। इससे निजी ट्यूबवेलों से सिंचाई करनी पड़ती है। रिबोर तो कहीं मोटर खराब होने से नलकूप बंद पड़े हैं।-हरिकेश यादव, अहरौला
सिंचाई के लिए लगे राजकीय नलकूप बनते- बिगड़ते रहते हैं। वर्तमान में 622 में से 13 नलकूप खराब पड़े हैं, इनको बनवाया जा रहा है। जिले में तैनात 89 ऑपरेटर बारी-बारी से नलकूपों का संचालन करते हैं। छह नलकूपों के रिबोर के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। एके आजाद, अधिशासी अभियंता नलकूप
पवई के भरचकिया में खराब पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद
पवई के भरचकिया में खराब पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद
पवई के भरचकिया में खराब पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद
पवई के भरचकिया में खराब पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद
पवई के भरचकिया में खराब पड़ा राजकीय नलकूप। संवाद