आजमगढ़। चार माह से ज्यादा समय तक चली 54 करोड़ के छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के गबन की कालेजवार जांच फुस्स हो गई है। 10 कमेटियां इस समय में हाथ-पांव तो मारती रहीं, लेकिन उनकी जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। चार माह की जांच का कहीं ओर छोर नहीं दिखने पर जिलाधिकारी ने इसी कमेटी को अब बैंकवार जांच के निर्देश दिए हैं।
समाजकल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति एवं पेंशन आदि के मदों में लगभग 150 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। इसमें जांच के बाद वर्ष 2014 में 2.86 करोड़ के साक्ष्य मिलने पर कई लोगों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। वहीं, 540 करोड़ के घोटाले के और साक्ष्य मिलने की बात कही गई थी। तब से ठंडे बस्ते में पड़े मामले के फिर मीडिया की सुर्खियां बनने पर हरकत में आए प्रशासन ने फिर कार्रवाई शुरू की थी। चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और कई लोगों को आरसी भी जारी हुई थी। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में 50 स्कूल-कालेजों हुए 54 करोड़ों के घोटाले में जांच अधिकारी अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह की ओर से डीसीबी में खोले गए संदिग्ध खातों को चिह्नित भी कर लिया गया था। इन खातों में सभी के आय, निवास, जाति आदि प्रमाण पत्रों का क्रमांक एक सरीज में होने कारण इन खातों में गई रकम के गबन की बात कही गई थी।
इसकी जांच चल ही रही थी कि इस बीच कमिश्नर के निर्देश पर जांच जल्द पूरी करने के लिए 10 टीमों का गठन कर सभी टीमों को पांच-पांच स्कूल-कालेजों की जांच के निर्देश दे दिए गए। साथ ही चिह्नित डीसीबी के खातों में सीबीएस बैंकों के खातों को भी शामिल कर दिया गया। इससे जांच और उलझ गई। सितंबर में गठित ये टीमें चार माह बाद भी स्कूलवार जांच करके कोई खास निष्कर्ष नहीं दे पाई। लिहाजा जिलाधिकारी ने इन्ही टीमों को अब बैंकवार जांच के निर्देश दिए हैं। अब ये टीमें बैंकवार खातों की जांच कर जारी किए गए धन की जानकारी करेंगी। अब सबकी निगाहें टिकी हैं कि बैंकवार जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है।
54 करोड़ के गबन में जांच टीमों को अब बैंकवार जांच के निर्देश दिए गए हैं। सभी टीमों को पांच-पांच कालेजों की जांच सौंपी गई है। जल्द से जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीबी सिंह, जिलाधिकारी