आजमगढ़। ठंड में दूरदराज से आने वाले यात्रियों और गरीबों एवं असहायों के लिए ठंड निजात पाने की सबसे पड़ी समस्या होती है। इसके लिए वो रैन बसेरे की शरण लेता है। शहर में रैन बसेरा तो एक है लेकिन यहां पर सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। हॉल में तीन चौकियां और कुछ गद्दे तो पड़े हैं, लेकिन कर्मचारी की तैनाती न होने से रैनबसेरे पर ताला पड़ा है।
तापमान गिरने के कारण गलन बढ़ने लगी है। लेकिन यात्रियों और गरीबों के लिए रैन बसेरे में अभी तक नगरपालिका प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। गरीबों और असहायों के साथ ही गैर जनपद से आने वाले यात्रियों को यहां परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं अभी तक रैन बसेरे में किसी कर्मचारी की तैनाती तक नहीं की गई है, जो 24 घंटे रैन बसेरे में मौजूद रह सके। इससे वहां पर ताला पड़ा हुआ है। रैन बसेरे का निर्माण पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव ने कराया था। जब तक वह थे यहागं की व्यवस्था पूरी तरह से चाक चौबंद थी, लेकिन उसके बाद यह डावांडोल हो गई। यहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है। कमरे में दो-तीन चौकियां लगी है और उस पर कुछ गद्दे और कंबल रखे हुए हैं। जितने गद्दे हैं उतनी चौकियां भी नहीं हैं। ऊपर से इसके बंद रहने से भी किसी को फायदा नहीं मिल रहा है। ठंड से निजात दिलाने में लकड़ी का भी अहम रोल होता है लेकिन नगरपालिका की ओर से अभी तक लकड़ी के लिए कोई टेंडर तक नहीं किया गया है। गलन धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। जबकि शासन की ओर से समस्त तहसीलों में कंबल वितरण के लिए पांच-पांच लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही अलाव जलवाने के लिए प्रति तहसील 50 हजार रुपये दिए गए हैं। अगर कोई तहसील छोटी है तो उसके पैसे को काटकर दूसरी बड़ी को दे दिया जाएगा। वहीं नगर पालिका प्रशासन जिसे अपनी व्यवस्था स्वयं करनी है उसने लकड़ी का टेंडर तक नहीं कराया है।
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अभी ज्यादा ठंड नहीं है जैसे ही ठंड बढ़ेगी रैन बसेरे पर कर्मचारी की तैनाती कर दी जाएगी। अलाव की लकड़ी के लिए अभी तक टेंडर नहीं हुआ है लेकिन जल्द ही टेंडर करा दिया जाएगा। तहसीलों को पैसा शासन से आ गया है लेकिन हमें राज्य वित्त आदि से इसकी व्यवस्था करनी है। ठंड बढ़ने के साथ अलाव भी जलने लगेंगे।
प्रतिभा सिंह, ईओ नगरपालिका आजमगढ़।