आजमगढ़। नगर निकाय चुनाव की मतगणना का कार्य पूरा हो चुका है। सभी पार्टियां और उनके प्रत्याशी हार पर मंथन करने में जुट गए। लेकिन इस नगर निकाय चुनाव में निर्दल प्रत्याशी पार्टी प्रत्याशियों पर भारी पड़े। इसमें पार्टियों द्वारा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों का चयन सही ढ़ंग से नहीं किया गया। जिसका परिणाम रहा पार्टी प्रत्याशियों पर निर्दल प्रत्याशी हावी रहे।
आजमगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में निर्दल प्रत्याशियों के बीच टक्कर और उनके पहले दूसरे स्थान पर होने से हर कोई अचंभित है। आजमगढ़ नगरपालिका चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। यहां भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह पांचवें स्थान पर रहे। बताते चलें कि नगर निकाय चुनाव की घोषणा होने के साथ ही दर्जनों लोग भाजपा से टिकट पाने की कतार में लग गए। इसमें कई पार्टी के ऐसे कार्यकर्ता थे जो पार्टी के साथ वर्षों से खड़े थे। चाहे पार्टी सत्ता में रही हो या नहीं उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। इस कतार में निवर्तमान पालिकाध्यक्ष के पुत्र भी लाइन में लगे थे। लेकिन पार्टी ने सबको किनारे करते हुए नए चेहरे अजय सिंह पर भरोसा जताया। अजय सिंह के मैदान में उतरने से पार्टी के टिकट मांगने वाले लोग उनके साथ तो हो गए लेकिन कितने मन से साथ थे इसका फैसला मतगणना में हो गया। वहीं सपा ने नए चेहरे व्यापारी नेता पदमाकर लाल वर्मा पर दांव खेला। लेकिन व्यापारियों में पदमाकर को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली। हालांकि पूर्व मंत्री और सपा के दिग्गज नेता दुर्गा प्रसाद यादव जिन्होंने जिद करके पदमाकर को टिकट दिलाया था उन्हें जिताने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया। इसके बाद भी वह उन्हें चुनाव में जीत नहीं दिला सके। बसपा ने पूर्व में पार्टी से नगर पालिकाध्यक्ष रह चुकी शीला श्रीवास्तव से किनारा कर नए चेहरे सुधीर सिंह पप्लू पर दांव खेला लेकिन उसका यह दांव उल्टा पड़ गया। टिकट न मिलने पर शीला निर्दल मैदान में उतरी और जीत गई। अगर बसपा ने शीला पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया होता तो आजमगढ़ नगरपालिका की सीट बसपा के खाते में होती। कुछ ऐसा ही हाल नगर पंचायतों का भी रहा लगभग हर जगह पर प्रत्याशी के चयन में की गई गड़बड़ी का फायदा निर्दलीय प्रत्याशियों को मिला। इस प्रकार अगर देखें तो टिकट कटने से कई प्रत्याशियों को भीतरघात का भी सामना करना पड़ा है। जिसका फायदा निर्दलियों ने उठाया और पार्टी प्रत्याशियों की नैया डुबोने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। रही सही कसर मतदाताओं ने पूरी कर दी। अब जब पार्टियां हार पर मंथन करने बैठेंगी तो उन्हें सबसे पहले अपने द्वारा उतारे प्रत्याशियों के चयन पर मंथन करना होगा।