आजमगढ़। नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने जनपद की दो नगरपालिका सीटों और 11 नगर पंचायत सीटों में दोनों नगरपालिकाओं और 10 नगर पंचायत सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से दो सीटों को छोड़कर भाजपा किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी। पार्टी द्वारा जिले में उतारे गए 12 प्रत्याशियों में से 10 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।
भाजपा के हार की वजहों पर चर्चा करें तो इसके कई कारण हैं। पार्टी की केंद्र और प्रदेश में सरकार होने के बाद भी पार्टी की इतनी दयनीय हालत होने की किसी ने आशा भी नहीं की थी। पार्टी ने सरायमीर और लालगंज में जीत हासिल अपने घाव पर थोड़ा मरहम तो लगा लिया। लेकिन एक तरह से भाजपा सांसद नीलम सोनकर ने अपनी प्रतिष्ठा बचा ली। क्योंकि उनके लोकसभा क्षेत्र में भाजपा दो सीटों पर विजय हासिल करने में कामयाब रही। सबसे ज्यादा पार्टी को निराशा माहुल सीट पर हुई। जहां से पार्टी के विधायक की मां और पूर्व भाजपा सांसद रमाकांत यादव की पत्नी सत्यभामा मैदान में थी। यहां पर उनकी हार ने सभी को चौंकने पर विवश कर दिया। क्योंकि सभी को विश्वास था कि पार्टी इस सीट पर जीत जरूर हासिल करेगी। क्योंकि यह सीट पूर्व सांसद के कद को देखते हुए उनकी प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी। लेकिन प्रतिष्ठा की इस जंग में पूर्व सांसद और भाजपा विधायक हार गए। जबकि आजमगढ़ नगरपालिका और अन्य नगर पंचायतों को देखें तो पार्टी प्रत्याशी तीसरे से लेकर नौवें स्थान तक ही पहुंच सके।
पार्टी की हार के कारण:
प्रत्याशी चयन में गड़बड़ी:
जनपद के नगर निकाय चुनाव में सत्तारुढ़ पार्टी की ऐसी हालत पर कोई भी आश्चर्य नहीं है। क्योंकि आजमगढ़ जनपद को सपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन अगर पार्टी द्वारा प्रत्याशी के चयन में थोड़ी भी सावधानी बरती गई होती तो पार्टी की यह हालत नहीं होती। सबसे बड़ी हार पार्टी को आजमगढ़ नगरपालिका क्षेत्र और माहुल नगर पंचायत में मिली। आजमगढ़ नगरपालिका में इसके पूर्व पार्टी की ही इंदिरा देवी जायसवाल अध्यक्ष थी। इस नपा क्षेत्र से पार्टी से कई दिग्गज टिकट की आस लगाए हुए थे। जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता संत प्रसाद अग्रवाल, सुनील राय, अभिषेक जायसवाल दीनू, चंद्रशेखर सिंह, मेनका श्रीवास्तव आदि लोग शामिल थे। लेकिन पार्टी ने सभी को दरकिनार करते हुए अजय सिंह को प्रत्याशी बनाया लेकिन पार्टी का यह दांव उल्टा पड़ गया। इसी तरह से माह़ुल नगर पंचायत में भी पार्टी से जुड़े ओमप्रकाश और सुबेदार दावेदारों की लाइन में लगे थे। लेकिन पार्टी ने पूर्व भाजपा सांसद रमाकांत यादव की पत्नी सत्यभामा यादव को प्रत्याशी बनाया। ओमप्रकाश और सुबेदार निर्दल के रूप में मैदान में कूद पड़े। इसी तरह से पार्टी द्वारा हर जगह प्रत्याशी चयन में की गई गड़बड़ी का खामियाजा भुगता।
पार्टी का चुनाव प्रबंधन भी रहा कमजोर:
भाजपा प्रत्याशियों की हार में चुनाव प्रबंधन भी एक महत्वपूर्ण कारण बना। किसी भी प्रत्याशी के पास कोई बड़ा ऐसा नाम नहीं था जो चुनाव की हर गतिविधि पर नजर रखते हुए उसके हिसाब से अपनी रणनीति तैयार कर सके। सभाओं में बड़े चेहरे मंच की शोभा बढ़ाते रहे लेकिन मतदाताओं के दरवाजे पर इनके दर्शन नहीं हुए। अगर यह चेहरे मतदाताओं के दरवाजे पर खड़े होते तो शायद आज परिणाम कुछ और होते।
निर्दलीय प्रत्याशी को बिठाना भी पड़ा भारी:
आजमगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में टिकट न मिलने पर निवर्तमान पालिकाध्यक्ष इंदिरा देवी जायसवाल के पुत्र अभिषेक जायसवाल दीनू ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। पार्टी के दबाव में उन्हें नामांकन वापस लेना पड़ा लेकिन यह पार्टी के लिए घातक सिद्घ हुआ। क्योंकि जिन मतों को उनके बैठने के बाद भाजपा के पक्ष में मुड़ने के आसार थे वह भाजपा की मुड़ने की बजाए अन्य प्रत्याशियों की ओर मुड़ गए। इसलिए पार्टी को दीनू के नामांकन वापस लेने का कोई फायदा नहीं मिला। जबकि कई जगहों पर पार्टी बगावत कर मैदान में उतरे प्रत्याशी पार्टी प्रत्याशी की हार का कारण बने।
अब कई पदाधिकारियों पर गिर सकती है गाज:
चुनाव के दौरान अपने मनचाहे प्रत्याशी को टिकट न मिलने के कारण बहुत से पार्टी पदाधिकारी लोगों से वोट मांगने से बचते रहे। यहां तक कि वह साथ तो पार्टी प्रत्याशी के थे लेकिन उन्होंने किसी से भी पार्टी के लिए वोट देने को नहीं कहा। कुछ जगहों पर पार्टी प्रत्याशी के विरोध में लोगों ने अपना झंडा बुलंद कर दिया। अब जब पार्टी चुनाव की हार का मंथन करने बैठेगी तो ऐसे कई नामों पर चर्चा जरूर करेगी। हो सकता है कि जल्द ही कई पार्टी पदाधिकारियों की उनकी पद से छुट्टी कर दी जाए। तो कई को पार्टी से बाहर भी कर दिया जाए।
नगर निकाय चुनाव के फैसलों से हम पूरी तरह से संतुष्ट हैं। पहली बार जनपद में पार्टी ने दो नगरपंचायत सीटों पर जीत हासिल की जबकि एक जगह फूलपुर में पार्टी समर्थित उम्मीदवार विजयी हुआ। रही बात आजमगढ़ नगरपालिका की सीट की तो जनता फैसला शिरोधार्य है। प्रत्याशियों का चयन गलत हुआ यह हम नहीं कह सकते। क्यों कि अगर यहीं उम्मीदवार जीत जाते तो सभी लोग प्रत्याशियों के चयन को सही ठहराते। इसलिए हम शीर्ष नेतृत्व के फैसले को सही मानते हैं।
प्रेम प्रकाश राय, जिलाध्यक्ष भाजपा।