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विस्फोट पर लगे थे मेटल डिटेक्टर, अब सिपाही भी नहीं

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आजमगढ़। विधान भवन में विस्फोटक मिलने के बाद डीजीपी ने भले ही प्रदेश में अलर्ट घोषित कर सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हों, लेकिन प्रदेश के अतिसंवेदनशील जिलों में शामिल आजमगढ़ में सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों का सुरक्षा भगवान के भरोसे ही है। इसमें जिलाधिकारी कार्यालय, दीवानी न्यायालय, रोडवेज परिसर और रेलवे स्टेशन तक शामिल है। कचहरी में विस्फोट के बाद यहां भी मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे, मगर अब यहां सुरक्षाकर्मी भी दूर-दूर तक नहीं नजर आते। लोग हाथों में कोई भी सामान लेकर बेरोकटोक आते-जाते रहते हैं। अलर्ट घोषित होने के बाद जिले के सार्वजनिक स्थलों का ये हाल है तो सामान्य दिनों की क्या व्यवस्था होगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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कलक्ट्रेट के नीचे बिना चेकिंग वाहनों की पार्किंग
समय- 1.15 बजे
कलेक्ट्रेट के प्रथम तल में वाहनों की पार्किंग की जाती हैं। गाड़ी पार्क करने के लिए कलेक्ट्रेट के भीतर प्रवेश के लिए कुल तीन गेट बने हैं। इसमें एक बंद रहता है। दो हमेशा खुले रहते हैं। इसमें एक प्रमुख गेट से अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन प्रवेश होते हैं, जबकि दूसरे गेट से अधिवक्तागण और सामान्य लोग आते-जाते हैं। दोनों गेटों पर कभी भी कोई सुरक्षाकर्मी या होमगार्ड नहीं तैनात रहता। ऐसे में कोई भी व्यक्ति बड़े आसानी से वाहन में कुछ भी लेकर घुसकर किसी भी घटना को अंजाम दे सकता है। शुक्रवार को दिन में 1.15 बजे कलेक्ट्रेट के दोनों गेट से आमजनों का प्रवेश हो रहा था। ज्यादातर लोग वाहन खड़ा कर नीचे आराम फरमाते दिखे।

दीवानी न्यायालय: कुछ भी ले जाओ, कोई पूछने वाला नहीं
समय - 1.25 बजे
दीवानी न्यायालय में सुबह से लेकर शाम तक अधिवक्ता और वादकारियों की भीड़ लगी रहती है। प्रतिदिन अपराधियों की पेशी होती है। न्यायालय में प्रवेश के लिए कुल पांच गेट बने हैं। सभी गेट के सामने सड़क से हमेशा वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। कचहरी में प्रवेश के लिए बने गेट पर भी सुरक्षा का कोई खास प्रबंध नहीं किया गया है। आलम यह है कि गेट से कोई भी आसानी से हाथ में झोला, बोरा आदि लेकर शुक्रवार को आ जा रहा था लेकिन उसे कोई टोकने वाला नहीं था। वर्षों पहले कचहरी में बम ब्लास्ट होने के बाद गेट पर सुरक्षा की दृष्टि से मेटल डिटेक्टर लगाया गया गया था, लेकिन बाद में उसे भी हटा लिया गया।
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रेलवे स्टेशन पर आराम फरमाती मिली पुलिस
समय - 1.50 बजे
आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को दिन में 1.50 बजे का दृश्य यह रहा कि आरक्षण केंद्र पर टिकट लेने वालों की भीड़ लगी हुई थी। जबकि जीआरपी के दरोगा और सिपाही अपने-अपने कमरे में आराम फरमा रहे थे। रेलवे स्टेशन के बाहर जीआरपी नहीं नजर आ रही थी। जबकि स्टेशन के भीतर यात्रियों के बीच-बीच में आरपीएफ के शस्त्र जवान बैठे हुए दिखे। जबकि यात्री परिवार सहित ट्रेन आने का इंतजार कर रहे थे। स्टेशन पर बैठे आरपीएफ के जवान बैठे तो जरुर थे। लेकिन स्टेशन पर आने-जाने वालों के विषय में कोई पूछताछ या सावधानी नहीं बरतते हुए दिखे।


रोडवेज परिसर: बसों के साथ यात्री भी सड़क पर
समय - 2.20 बजे
प्रदेश के दस बड़े रोडवेज डिपो की सूची में आजमगढ़ है। यहां से प्रदेश के हर कोने में बसें गुजरती हैं। रोडवेज भवन का निर्माण होने की वजह से पूरा रोडवेज विभाग ही सड़क है। यहां सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी तो बनाई गई है। लेकिन सिपाही सिर्फ शाम को प्राइवेट वाहनों से पैसा लेने आते हैं। इसके बाद इनका कोई पता नहीं रहता। शुक्रवार को दिन में 2.20 बजे का आलम यह रहा कि रोडवेज पर यात्रियों की भीड़ लगी हुई थी। लेकिन सुरक्षाकर्मी और विभागीय अधिकारी कर्मचारी यहां दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे थे। पूछने पर रोडवेज के एक कर्मचारी ने बताया कि जब कुछ होना होगा तो हमारे आपके सुरक्षा करने से थोड़े ही रुकेगा। वह हो जाएगा।
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