आजमगढ़। आजादी के बाद 1957 में हुए दूसरे लोकतंत्र के चुनाव में आजमगढ़ से चुने जाने वालों सांसदों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी गई थी। एक सांसद स्वर्ण जाति से दूसरा अनुसूचित जाति से चुना जाना था। चुनाव में कुल 8.26 लाख मतदाताओं में 6.84 लाख मतदाताओं ने अपने मतदान का प्रयोग किया। इस चुनाव में कांग्रेस से कालिका और विश्वनाथ प्रसाद सांसद चुने गए थे।
अंग्रेजी हुकुमत से 1947 में देश को आजादी मिली। इसके बाद देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए पहली बार 1952 में चुनाव हुए। पहले चुनाव में जनपद से तीन मतदाताओं को चुना गया था। पहले चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या सात लाख 60 हजार 755 थी। 1957 में हुए लोकतंत्र के दूसरे चुनाव में मतदाताओं की संख्या आठ लाख 26 हजार 991 हो गई। जो पहले चुनाव की तुलना में 66 हजार 236 अधिक थी। दूसरे चुनाव में सांसदों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी गई। इसमें एक सांसद सवर्ण जाति का और दूसरा सांसद अनुसूूचित जाति का होना जरूरी था। इस चुनाव के लिए हुए नामांकन में कुल सात प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया। इसमें कांग्रेस से दो प्रत्याशी कालिका सिंह और विश्वनाथ, प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी से प्रोफेसर मुकुट बिहारी लाल ने नामांकन दाखिल किया। इनके अलावा गजराज, रामधन और देश सेवक राम सुमेर ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया। 25 फरवरी 1057 को हुए मतदान में कालिका सिंह को एक लाख 38 हजार 247 मत, प्रो. मुकुट बिहारी लाल को एक लाख 19 हजार 478 मत, विश्वनाथ प्रसाद को एक लाख तीन हजार 239 मत और मंगलदेव को 99 हजार 589 मत प्राप्त हुए। मतगणना के बाद कांग्रेस के कालिका सिंह और विश्वनाथ को विजयी घोषित किया गया। कालिका सिंह को मिला मत सबसे अधिक था ,इसलिए उन्हें सांसद चुना गया लेकिन विश्वनाथ को उनके और कालिका सिंह के मत को मिलाकर विजयी घोषित किया गया। पीएसपी के प्रो. मुकुट बिहारी लाल और मंगलदेव को मिले मत इनसे कम थे। देश के दूसरे लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत भी पहले चुनाव की तुलना में अधिक था। पहले चुनाव में जहां 36.51 प्रतिशत मतदान हुआ था वहीं दूसरे चुनाव में मतदान का प्रतिशत 41.39 प्रतिशत रहा।