आजमगढ़। नगर के रैदोपुर स्थित शारदा टाकिज परिसर में चल रहे आरंगम 2018 की मंगलवार की चौथी शाम जयशंकर प्रसाद की कामायनी और भोजपुरी लोकगीत गायक सौरभ सम्राट के नाम रही। सौरभ सम्राट ने भोजपुरी गीतों में पूर्वी, छपरहिया, निर्गुण और चैता से दर्शकों को भोजपुरी लोक संस्कृति की मिठास रूबरू कराया। इसके बाद रंगमंच के कलाकारों ने कामायनी का जोरदार मंचन किया।
व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में नाटक की कथा प्रलय से आरंम्भ होती है। जलप्लावन के बाद अकेला बचा मनु हिमालय की एक चोटी पर उदास आंखों से विनाश को देख रहा था। तभी वहां सृष्टि की पहली स्त्री श्रद्धा का आगमन होता है। वह हताश मनु को नए जीवन और कर्म के लिए प्रोत्साहित करती है। दोनों मिलकर नूतन निर्माण करते हैं। इस बीच उनके मन में एक दूसरे के प्रति अनुराग उत्पन्न हो गया है। श्रद्धा गर्भवती है लेकिन असुर पुरोहितों के फेर में पड़कर मनु का ध्यान निर्माण के बजाए आखेट, यज्ञ, बलि और सुरा जैसी वस्तुओं में लग गया है। यहां तक कि श्रद्धा के मुख से आसन्न संतति की बात सुनकर वह जल भुन जाता है और उसे छोड़कर चला जाता है। अब उसकी मुलाकात दूसरी स्त्री, बुद्धि की प्रतिनिधि इड़ा से होती है। दोनों मिलकर कर्मशक्ति से एक नया सारस्वत प्रदेश विकसित करते हैं। प्रजा, और राज्य, सबकुछ, मनु और इड़ा के समवेत नेतृत्व में फल-फूल रहे हैं, लेकिन मनु को निर्माता होने का अभिमान हो गया है। वो अधिपति की तरह व्यवहार करता है और इड़ा को भी पाने की कोशिश करता हैं। इड़ा इंकार कर देती है और प्रजा ऐसी धृष्टता के लिए मनु पर क्रुद्ध हो जाती है और उसे घायल कर देती है। उधर श्रद्धा और मनु का पुत्र मानव बड़ा हो गया हैं। अपनी मां के साथ पिता को खोजने निकला हैं। एक स्थल पर घायल, अचेत पिता पड़े मिलते हैं। मनु अब भी पलायन करना चाहते हैं लेकिन श्रद्धा उनका साथ छोड़ने को तैयार नहीं है। इड़ा पुत्र और शासन का दायित्व संभालने को तैयार हो जाती है और मनु श्रद्धा के साथ हिमालय की ओर तपस्या करने चले जाते हैं। अभिनेताओं की शारीरिक लय, गति, ताल ने जहां दर्शकों विस्मृत कर दिया। वहीं जेपी शर्मा और आशीष मिश्र का संगीत, व्योमशुक्ल की प्रकाश परिकल्पना और सधा हुआ निर्देशन दर्शकों को पुरातन युग में लेकर चला गया। इस अवसर पर डा. सीके त्यागी, डा. खुश्बू सिंह, डा. एके सिंह, सोनी पांडेय डीडी संजय, अविनाश सिंह, तरूण राय आदि उपस्थित थे।