आमजगढ़। जिले में साफ पानी के नाम पर साधारण पानी बेचने का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। बिना लाइसेंस के घर-घर आरओ प्लांट लगाकर पानी बेचा जा रहा है। शहर को कोई ऐसी गली नहीं होगी जहां अवैध रूप से आरओ प्लांट न लगाया गया हो। देखा जाए तो सिर्फ शहर में 25 से 30 आरो प्लांट का संचालन किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि विभाग में आज तक एक भी प्लांट का पंजीयन नहीं कराया गया है। आरओ के नाम पर साधारण टंकियों और सबमर्सिबल का पानी बेचा जा रहा है। इसे पीकर शहरवासी बीमार हो रहे हैं, लेकिन एफडीए की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
शहर में सुबह से ही घरों, सरकारी-निजी कार्यालयों, दुकानों आदि में खुलेआम वाहनों के माध्यम से केन, पाउच और बोतलों में पानी पहुंचाना शुरू हो जाता है। कुछ लोग तो आरओ के नाम पर सीधे टंकी और सबमर्सिबल पंप का पानी पहुंचाकर लोगों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। हां आरओ के पानी के नाम पर सिर्फ इसे ठंडा कर दिया जाता है। बड़े केन के साथ प्लास्टिक के पाउच में भी पानी भरकर बेचा जा रहा है। इनके खिलाफ शिकायतें भी होती हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग बिना पंजीयन के इन प्लांटों के चलने की बात तो स्वीकारता है, लेकिन कार्रवाई से मुंह मोड़ता रहता है।
दिल्ली से मिलता है लाइसेंस
आजमगढ़। एफडीए की माने को आरओ प्लांट लगाने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के लाइसेंस की आवश्यकता होती है। पानी जांच के बाद इसे दिल्ली से जारी किया जाता है। यहां से आईएसआई हालमार्क जारी कर पानी पैक करने की अनुमति दी जाती है। बीआईएस से लाइसेंस मिलने के बाद ही एफडीए की ओर से लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे शुरू होती है। शहर में सप्लाई होने वाले आरओ के पानी केन और बोतलों में सील पैक नहीं होता है। इसी बात का हवाला देकर एफडीए के अधिकारी कार्रवाई से बच निकलते हैं।
अमोनिया मिलाकर ठंडा करते हैं पानी
आजमगढ़। पानी में अमोनिया मिलाकर बेचने की शिकायत भी आम हो चुकी है। बताया जाता है अमोनिया मिलाने से पानी जल्दी ठंडा हो जाता है और उसकी ठंडक कई घंटे तक बनी रहती है। हालांकि पानी के संपर्क में नहीं आने का कारण इसका सेहत पर फर्क नहीं पड़ता है।
सरकार की ओर से इस मामले में कोई कानून न होने से कार्रवाई नहीं हो पाती है। फिर भी इस ओर हमारी निगाह है। इनकी जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश कुमार राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी