जीयनपुर के खाड़ गांव में चिंतित राकेश शर्मा के परिजन। संवाद
आजमगढ़। इस्रराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से इन देशों में रह रहे भारतीयों के परिजन परेशान हैं। सोशल मीडिया सहित टीवी, अखबारों से मिल रही खबरों से अपने बेटे की सलामती की दुआ हर मां कर रही हैं। जिले के भी करीब 500 युवा विभिन्न देशों में फंसे हैं। श्रम विभाग ने राष्ट्रीय कौशल विकास केंद्र से इन देशों में फंसे कामगारों की सूची मांगी है। ईरान के शीर्ष नेता खामनेई की मौत के बाद युद्ध के हालात और विकट हो गए हैं। तीसरे दिन सोमवार को भी लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमले होते रहे। इस्रराइल-अमेरिका और ईरान के बीच उपजे युद्ध में खाड़ी देश भी झुलस रहे हैं। अब यह युद्ध इराक, सउदी अरबिया, दुबई आदि विभिन्न खाड़ी देशों तक फैल चुका है। बीते वर्षों जिले के सरायमीर, मुबारकपुर, लालगंज आदि विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा इस्रराइल गए थे। इसके साथ ही खाड़ी देशों में भी बड़ी संख्या में युवा गए हैं।
जिले के करीब 500 युवा इस्रराइल और खाड़ी देशों में गए हैं। इसकी वास्तविक सूची एनएचडीसी (राष्ट्रीय कौशल विकास केंद्र) से मांगी गई है। सूची के आधार पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। -राजीव कुमार सिंह,
उप श्रमायुक्त आजमगढ़।
25 को थी बहन की शादी नहीं आ पाए राकेश-लाटघाट। जीयनपुर थाना क्षेत्र के खाड़ गांव निवासी राकेश शर्मा पिछले एक साल से इस्रराइल में रह रहे हैं। उनकी बहन रंजना की शादी 25 फरवरी को थी लेकिन वो शादी में नहीं आ पाए। पिता लालमन शर्मा लाटघाट बाजार में सैलून में काम करते हैं। युद्ध के हालात से मां उर्मिला काफी चिंतित हैं। पत्नी सीमा ने बताया कि हमारी बात उनसे बराबर हो रही है और सब कुशल हैं। उन्होंने बताया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। राकेश शर्मा के साथ इस्रराइल में रह रहा मधुबन मऊ निवासी वेद प्रकाश शुक्ला जुगनू ने बताया कि बमबारी के 10 मिनट पहले सूचना हो जाती है। हम लोग अपने क्वार्टर के नीचे बने बंकर में चले जाते हैं। यहां 25 से 30 लोग हैं। संवाद
कमल ने बताया, बंकर में छिपकर बचानी हो रही जान-अमिलो। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के आदमपुर ग्राम निवासी कमल चौहान इस्रराइल में रहकर अपनी रोजी-रोटी के लिए काम करने गया है। कमल के चाचा हरिवंश चौहान ने बताया कि कमल मई 2024 में इस्रराइल गया था, तबसे वहां रह रहा है। कमल ने परिजनों को बताया कि सायरन बजने पर बंकर में शरण लेना होता है। बाकी सब सामान्य है। हमले से पहले मोबाइल पर अलर्ट मैसेज आ जाता है। कब कहाॅ हमला हो जाएगा ये पता नहीं है। हम लोग कमरे में ही रहते हैं। हमला होने का अलर्ट जारी होने पर बाहरी लोगों को बंकर में पनाह लेने का आदेश है। सरकार सुरक्षा के इंतजाम की पूरी व्यवस्था की है। हमले का सायरन बजने पर बाहर निकलने का आदेश नहीं है। काम पर जाने के लिए बुलाया जा रहा है, लेकिन ऐसे माहौल में काम पर जाना जान को जोखिम डालने के बराबर है। संवाद
कुवैत में फंसे परशुराम, परिजन परेशान : देवगांव। थाना क्षेत्र के तिरौली गांव निवासी परशुराम चौहान कई वर्षों से कुवैत में रह रहे हैं। पिता लालचंद चौहान असम में अपना खुद का काम करते हैं। पत्नी पूनम ने बताया कि युद्ध को लेकर पूरा परिवार सहमा है। हमारी बात उनसे बराबर हो रही है। सब कुशल है। कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। कुवैत में कंपनी का काम बंद है। प्राइवेट घरों में चोरी-छिपकर प्लंबरिंग आदि का काम कर रहे हैं। लगातार धमाके की तेज आवाज सुनाई दे रही है। संवाद