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एक अपात्र को शौचालय देने पर सेक्रेटरी निलंबित, सौ अपात्रों पर मेहरबानी

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आजमगढ़। अपने कारनामों को लेकर परियोजना निदेशक डीआरडीए और पंचायती राज विभाग एक बार फिर चर्चाओं में है। बिलरियागंज ब्लाक के जयराजपुर में मात्र एक अपात्र को शौचालय देने में तत्कालीन सेक्रेटरी के निलंबित कर दिया गया। वहीं, तहबरपुर ब्लाक के मेहमौनी में लगभग सौ शौचालयों में घालमेल के मामले में आदेश के बाद भी सेक्रेटरी और अन्य अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों की ये मेहरबानी चर्चा का विषय बना हुआ है। डीएम के निर्देश पर तहबरपुर ब्लाक के मेहमौनी गांव की दोबारा जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा खुल कर सामने आया था। सीवीओ डॉ. वीके सिंह, एसडीएम बागीश शुक्ल और एई डीआरडीए की रिपोर्ट में मनरेगा और अन्य विकास कार्यों में 20 लाख से ज्यादा की धनराशि के अनियमितता की बात सामने आई थी। बिना पोखरों की खुदाई कराए और मरम्मत कार्य को नया काम दिखा कर धनराशि का दुरुपयोग किया गया था। आवास आवंटन में नियमों का जमकर माखौल उड़ाया गया है। 2010 से अब तक जारी 236 आवासों में अधिकतर पूरे नहीं मिले थे। लगभग सौ आवासों में फर्जीवाड़ा सामने आया था। मामले में डीएम की ओर से 22 जुलाई को ही प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ परियोजना निदेशक को सेक्रेटरी, उपायुक्त श्रम रोजगार और तकनीकि सहायक पर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, आठ अगस्त को बिलरियागंज ब्लाक के जयराजपुर में मात्र एक अपात्र को शौचालय देने के मामले में तत्कालीन सेक्रेटरी को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। छोटे मामले में तुरंत कार्रवाई होने और सौ आवासों के फर्जीवाड़े जैसे बड़े मामले में कार्रवाई न होने से चर्चाओं का बाजार गरम है।
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ये मिली थी गड़बड़ी
आजमगढ़। मेहमौनी गांव में 2010 से अब तक कुल 236 आवास दिए गए हैं। मानक के विपरीत पति-पत्नी, पिता-पुत्र और अविवाहित को आवास दिया गया है। अनारी के परिवार को तीन आवास मिले हैं। दो अनारी के नाम और एक पुत्र नरेश के नाम है। राजदेई और पति अर्जुन को भी आवास मिला है। धर्मी पुत्र सोहित और राममलिन पुत्र सोहित को भी आवास मिला है। सोचन पुत्र दल्लू और सर्वेश पुत्र सोचन को भी आवास मिला है। ऐसे कई और अन्य मामले भी हैं। वर्ष 2010-12 में 18, 2013-14 में 17, 2014-15 में 12, 2015-16 में 22 और 2016-17 में 10 आवास ऐसे हैं जो विभिन्न स्तरों पर अभी भी अधूरे हैं, जबकि उसी वर्ष में धनराशि पूरी निकाल ली गई है। किसी पर करकट पड़ा है तो किसी की दीवार बनी है। अधिकारियों, कर्मचारियों की मिलीभगत से ये खेल हुआ है।

तहबरपुर ब्लाक के मेहमौनी गांव की जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी। डीडी शुक्ल, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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